चीन की सड़कों पर उतरेंगी 100 सेल्फ ड्राइविंग कारें, वोल्वो करेगी टेस्टिंग

चीन की सड़कों पर आने वाले कुछ महीनों में 100 के करीब सेल्फ ड्राइविंग या ऑटोनॉमस यानी अपने आप चलने वाली कारें उतरेंगी। रोजमर्रा के ट्रैफिक के बीच इन कारों को टेस्ट किया जाएगा। स्वीडिश ऑटोमोबाइल कंपनी वोल्वो यह बड़ा प्रयोग करने जा रही है। इस टेस्ट में स्थानीय ड्राइवर भी शामिल होंगे। चीन के कई शहरों में यह प्रयोग होना है। इसकी मंजूरी के लिए कंपनी चीनी प्रशासन से बात कर रही है।     

1959 में सीट बेल्ट का अविष्कार करने वाली वोल्वो अब कारों के लिए ऑटोनॉमस ड्राइविंग सिस्टम तैयार करने पर काम कर रही है। कंपनी की योजना साल 2020 तक कारों के लिए ऐसा सेफ्टी सिस्टम तैयार करने की है जिससे कार दुर्घटनाएं में कोई शख्स न तो गंभीर रूप से घायल होगा और न ही कोई मौत होगी। कंपनी का मानना है कि ऑटोनॉमस सिस्टम कार दुर्घटनाओं के मामलों को नीचे लाने में मददगार साबित होगा। इसके अलावा इन कारों से कम प्रदूषण होगा और ट्रैफिक जाम की समस्याओं से भी निजात मिलेगी।

कंपनी के दावे अपनी जगह हैं लेकिन बड़ा सवाल यह भी है कि दुनिया इस तरह की कारों के लिए कितनी तैयार है। ड्राइव के वक्त कई सारी परिस्थितियां ऐसी होती हैं जो अचानक पैदा होती हैं, उन पर किसी का बस नहीं होता। इसके अलावा ज्यादातर लोगों का यह भी मानना है कि ऐसी कारों में बैठा ड्राइवर, खुद कार चलाने के मुकाबले ज्यादा तनाव में रहेगा। हालांकि नई टेक्नोलॉज़ी की दुनिया अलग होती है, नई चीजें वक्त के साथ-साथ बेहतर होती जाती हैं। ऐसा ही कुछ ऑटोनॉमस ड्राइविंग सिस्टम के मामले में भी देखने को मिल सकता है।

वोल्वो के प्रेसिडेंट हाकन सैमुअलसन के मुताबिक ' ऑटोनॉमस कारों के कई फायदे हैं। इन्हें देखते हुए सरकारों के चाहिये कि वे कानून में बदलाव करें और ऐसी कारों के सड़कों पर आने का रास्ता जल्द से जल्द बनाएं। नई टेक्नोलॉजी का फायदा पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर को  मिलना चाहिये लिहाजा ऐसे मामलों में सभी को मिलकर काम करने की जरूरत है।'

देखें; कैसे चलती है सेल्फ ड्राइविंग वोल्वो कार

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कारदेखो

चीन की सड़कों पर उतरेंगी 100 सेल्फ ड्राइविंग कारें, वोल्वो करेगी टेस्टिंग