क्या आप भी हैं 'डिप्रेशन' के शिकार? संभल जाइए, शरीर में हो सकती है ये कमी...

नई दिल्ली (21 अगस्त): क्या आप कुछ समय से लगातार डिप्रेशन के शिकार हैं? जरा इन लक्षणों पर पहले गौर करिए-

- क्या आपको गर्मी में सर्दी लगती है? - हाथ-पैरों में झनझनाहट, जलन होती हैय़ - जोड़ों में दर्द होता है दिल की धड़कनें तेज होती है या सांसे फूलती है? - इसके अलावा त्वचा पीली पड़ रही है, मुंह तथा जीभ में दर्द होता है और भूख कम लगती है?

अगर ऐसा है तो जरा संभल जाएं क्योंकि आपको हो सकती है इस विटामिन की कमी। ऊपर बताए गए सारे लक्षण इस विटामिन की कमी से होते हैं। यह विटामिन वसा को ऊर्जा के रूप में परिवर्तित करता है। इसके अलावा यह शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं को बनाने का काम भी करता है। यह विटामिन इतना महत्वपूर्ण है कि यह मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के सही से काम करने, कोशिकाओं में पाए जाने वाले जीन डीएनए को बनाने और उनकी मरम्मत तथा ब्रेन, स्पाइनल कोर्ड और नसों के कुछ तत्वों की रचना में भी सहायक होता है।

यही नहीं यह शरीर के सभी हिस्सों के लिए अलग-अलग तरह के प्रोटीन बनाने का काम ही नहीं करता, वरन् शरीर के हर हिस्से की न‌र्व्स को प्रोटीन देने का काम भी करता है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस विटामिन का नाम है बी-12। जी हां यह शरीर का सबसे महत्व्पूर्ण विटामिन है और यह जन्म संबंधी विकृतियों के विकास को रोकने के लिए एक केंद्रीय तत्व है, इसलिए जो महिला गर्भ धारण की योजना बना रही है, उसे इसकी कमी की जांच जरूर करवा लेनी चाहिए।

विटामिन बी12 सबसे आखिरी विटामिन भले ही हो, लेकिन निरोगी जीवन की सबसे बड़ी और सबसे महत्वपूर्ण कुंजी है, जिसके बारे में सही जानकारी नहीं होने के चलते हम उस पर न तो ध्यान दे पाते हैं और न ही उसे संतुलित रखने के उपाय करते हैं। असल में यह विटामिन बी12 घातक एनेमिया के स्रोत, कारण और इलाज ढूंढ़ते-ढूंढ़ते अचानक ही वैज्ञानिकों के हाथ लग गया।

हैरत की बात यह भी है कि अधिकांश प्राणियों की तरह हमारे शरीर में भी आहार में लिए गए कोबाल्ट के इस यौगिक का अवशोषण छोटी आंत के अंत में आंतों की दीवार की कोशिकाओं द्वारा छोड़े गए एक जैव-रासायनिक अणु की सहायता से सूक्ष्मजीवों द्वारा होता है।

यदि शरीर में इस जैव-रासायनिक अणु की कमी है, तो हम भोजन में कितना भी बी12 लें, शरीर उसे ग्रहण करने में असमर्थ रहता है। इसी प्रकार, कोबाल्ट धातु/खनिज की आपूर्ति या विशिष्ट सूक्ष्मजीवों की अनुपस्थिति में प्राणियों के शरीर में इसका निर्माण संभव नहीं है।

शरीर को प्रतिदिन 2.4 माइक्रोग्राम विटामिन बी 12 आवश्यकता होती है और हमारे शरीर ने इसकी अधिक मात्रा को एकत्र रखने और जरूरत के हिसाब से उसका उपयोग करने के तंत्र में अपने को ढाला हुआ है। नई आपूर्ति के बिना भी हमारा शरीर बी12 को 30 वर्षों तक सुरक्षित रख सकता है क्योंकि अन्य विटामिनों के विपरीत, यह हमारी मांसपेशियों और शरीर के अन्य अंगों विशेषकर यकृत में भंडारित रहता है।

बी12 की कमी के अधिकांश मामले दरअसल उसके अवशोषण की कमी के मामले होते हैं क्योंकि चालीस पार के लोगों की बी12 अवशोषण की क्षमता धीरे-धीरे कम होती जाती है। बहुत सी दवाइयां भी लम्बे समय तक प्रयोग किए जाने पर बी12 के अवशोषण को अस्थाई रूप से या सदा के लिए बाधित करती हैं।

हाल ही के एक शोध की मानें तो भारत की लगभग 60-70 प्रतिशत जनसंख्या और शहरी मध्यवर्ग का लगभग 80 प्रतिशत विटामिन बी-12 की कमी से पीड़ित है। खास बात यह है कि देश में लगातार बढ़ रही मानसिक बीमारियों की एक वजह यह भी है। डिप्रेशन इसी वजह से होता है।