दुनिया के पहले 'इंजीनियर और वास्तुकार' भगवान विश्वकर्मा के बारे में कितना जानते हैं आप ?

नई दिल्ली (17 सितंबर): आज विश्वकर्मा पूजा है। इस मौके पर देशभर में भगवान विश्वकर्मा की धूम है। भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि का आदि शिल्पकार माना जाता है। हर साल 17 सितंबर को उनकी पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक आदि काल से ही विश्वकर्मा अपने विशिष्ट ज्ञान एवं विज्ञान के कारण न केवल मानव, बल्कि देवताओं के बीच भी पूजे जाते हैं। हिंदू धर्म के अनुसार विश्वकर्मा को दुनिया का सबसे पहला इंजीनियर और वास्तुकार माना जाता है।

मान्यता के मुताबिक भगवान विश्वकर्मा ने सृष्टि का निर्माण किया, इसलिए उन्‍हें सृष्टि का निर्माणकर्ता कहा जाता हैं। देवताओं के लिए अस्त्र-शस्त्र, आभूषण और महलों का निर्माण भगवान विश्वकर्मा ने ही किया। इंद्र का सबसे शक्तिशाली अस्त्र वज्र भी उन्होंने ही बनाया था।

प्राचीन काल में जितनी राजधानियां थीं, प्राय: सभी विश्वकर्मा की ही बनाई मानी जाती हैं। यहां तक कि सतयुग का ‘स्वर्ग लोक’, त्रेता युग की ‘लंका’, द्वापर की ‘द्वारिका’ और ‘हस्तिनापुर’ आदि जैसे प्रधान स्थान विश्वकर्मा के ही बनाए माने जाते हैं। ‘सुदामापुरी’ भी विश्वकर्मा ने ही तैयार किया था।

मान्यता है कि सभी देवों के भवन और उनके दैनिक उपयोग की वस्तुएं विश्वकर्मा ने ही बनाई थीं। कर्ण का कुंडल, विष्णु भगवान का सुदर्शन चक्र, महादेव का त्रिशूल और यमराज का कालदंड भी उन्हीं की देन हैं। कहते हैं कि पुष्पक विमान का निर्माण भी विश्वकर्मा ने ही किया था।