अमेरिका में रह रहे भारतीयों के लिए बुरी खबर, पत्नियों के वर्क परमिट वीजा पर पाबंदी लगाएगा US


न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (27 मई): अमेरिका अपने वीजा नीति में बड़ा बदलाव करने जा रहा है। पिछले दिनों राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने वीजा नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। नए नियमों के मुताबिक अब मेरिट के आधार पर ही विदेशियों को अमेरिका में आने की इजाजत दी जाएगी। अभी तक सिर्फ 12 फीसदी लोगों को स्किल के तहत ग्रीन कार्ड दिया जाता था, लेकिन नए नियमों के तहत इसे बढ़ाकर 57 फीसदी कर दिया जाएगा।


मौजूदा नियमों के मुताबिक ज्यादातर लोगों को वीजा पारिवारिक संबंधों के आधार पर मिलता है। मसलन, किसी व्यक्ति के परिवार का कोई सदस्य अगर अमेरिका में है तो उसके लिए वीजा मिलना आसान होता था। लेकिन आगे ऐसा नहीं होगा। इमीग्रेशन में तरजीह उन्हीं लोगों को मिलेगी, जिनके पास हायर एजुकेशन की डिग्री हो, प्रफेशनल क्वालिफिकेशन हो, अमेरिका में जॉब का ऑफर हो या खुद वहां लोगों को नौकरियां देने की स्थिति में हो, और जो इंग्लिश बोलता हो। इन सारी योग्यताओं के साथ उसे नागरिक शास्त्र का एक टेस्ट भी पास करना होगा।
राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है कि वह सस्ती मजदूरी पर काम करने वाले बेकार विदेशियों की भीड़ अमेरिका में नहीं जमा करना चाहते। वह चाहते हैं कि योग्य विदेशी वहां आएं और अमेरिका के निर्माण में अपना योगदान दें।


गौरतलब है कि अमेरिका हर साल तकरीबन 11 लाख ग्रीन कार्ड जारी करता है। इनके जरिये विदेशी नागरिकों को जिंदगी भर अमेरिका में रहकर काम करने की इजाजत मिल जाती है। यह कार्ड जारी होने के पांच साल बाद अगर वे चाहें तो उन्हें अमेरिकी नागरिकता मिलने का रास्ता भी खुल जाता है। बताया जा रहा है कि ट्रंप की इस नई योजना के पीछे उनके दामाद जैरर्ड कुशनर का दिमाग है। इसके पीछे यह मान्यता काम कर रही है कि अमेरिका में रहने वाले विदेशी अपने रिश्तेदारों को बुला लेते हैं जो वहां कुछ करते-धरते नहीं, उलटे अमेरिका की सामाजिक सुरक्षा पर बोझ बन जाते हैं। 


आपको बता दें कि भारतीयों में ही एक तबके को यह योजना आकर्षक लग रही है। उन्हें लगता है कि नई नीति से ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे हजारों भारतीय पेशेवरों की मुश्किलें खत्म हो सकती हैं और भारतीय छात्रों के लिए अमेरिका जाना आसान हो सकता है। लेकिन डर इस बात का है कि क्वॉलिफिकेशन, टेस्ट और तमाम तरह की शर्तें वीजा न देने का बहाना बन जाएंगी। वहां काम कर रहे भारतीयों के परिजनों को वीजा न दिए जाने का प्रभाव उनके कामकाज पर भी पड़ सकता है। अगर किसी की पत्नी या बुजर्ग मां-बाप उसके साथ रहते हैं तो वह व्यक्ति घर-गृहस्थी, बच्चों के लालन-पालन आदि की तरफ से निश्चिंत होकर अपने काम पर ज्यादा से ज्यादा फोकस कर सकता है। नए प्रस्तावों के तहत कोई प्रफेशनल अपने प्रतिभा के बूते अमेरिका चला भी जाए तो वहां उसकी काफी ऊर्जा रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने में ही नष्ट हो जाएगी और उसका सर्वोत्तम योगदान अमेरिका को शायद ही मिल पाएगा।