सहवाग ने खोला 2011 वर्ल्ड कप जीत का राज, तेंडुलकर के इस आइडिया को बताया 'मास्टर स्ट्रोक'

नई दिल्ली (10 जून): भारत ने श्रीलंका को हराकर 2011 विश्व कप का खिताब अपने नाम किया था। इस जीत से नायक रहे थे कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और गौतम गंभीर। फाइनल में गंभीर ने शानदार 97 और धोनी ने नाबाद 91 रनों की पारी खेली थी। उस मुकाबले में धोनी इन-फॉर्म बल्लेबाज युवराज सिंह के स्थान पर खुद नंबर-4 पर बल्लेबाजी करने आए थे। धोनी ने नुआन कुलासेकरा की गेंद पर छक्का लगाकर भारत को 28 साल बाद वर्ल्ड चैंपियन बनाया था। मुंबई के वानखेड़े में खेले गए फाइनल में धोनी मैन ऑफ द मैच रहे थे। लेकिन 2011 विश्व कप के फाइनल की कहानी बस इतनी भर नहीं थी। मुल्तान के सुल्तान यानी विरेंद्र सहवाग की मानें तो फाइनल में भारत की जीत की इबारत क्रिकेट के भगवान सचिन ने लिखी थी। वीरू की मानें तो तेंडुलकर ने इस मुकाबले में एक मास्टर स्ट्रोक चला था।

दरअसल एक शो में सचिन और सहवाग दोनों शामिल थे। चर्चा के दौरान 2011 के विश्व के फाइनल में भारत की जीत पर बात चली। सहवाग और सचिन दोनों उस मैच के गवाह थे। सहवाग ने शो के दौरान कुछ अनसुनी कहानियों के बारे में बताया। सहवाग ने बताया कि यह मास्टर स्ट्रोक किसी और ने नहीं बल्कि मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंडुलकर का था। उस ऐतिहासिक यादगार पल को याद करते हुए कहा कि ड्रेसिंग रूम में मैं और सचिन बात कर रहे थे और उस वक्त क्रीच पर गौतम गंभीर और विराट कोहली मौजूद कर रहे। दोनों बढ़ियां बल्लेबाजी कर रहे थे। टीम इंडिया धीरे-धीरे अपने लक्ष्य के नजदीक पहुंच रहा था तभी वहां धोनी आए। जैसे ही धोनी वहां आए सचिन ने उनसे कहा अगर लेफ्टी आउट होगा तो लेफ्टी को भेजना और राइटी हो तो तुम खुद बल्लेबाजी के लिए जाना। इतना कहने के बाद सचिन बाथरूम चले गए। इस दौरान कोहली आउट हो गए और धोनी खुद बैटिंग के लिए उतरे। जबकि उन दिनों शानदार फॉम में चल रहे युवराज सिंह नंबर-4 पर बल्लेबाजी के लिए आते थे। लेकिन सचिन की इस सलाह पर अमल करते हुए खुद धोनी नंबर-4 पर बल्लेबाजी के लिए उतरे। वीरू ने कहा कि सचिन सीधे तौर पर कभी मैसेज नहीं देते थे लेकिन उस दिन उन्होंने दिया और उसके बाद भारत ने जो किया वो इतिहास में दर्ज है।आपको बता दें कि सचिन अक्सर 2011 के विश्व कप में भारत की जीत को एक ‘अनमोल’ पल बताते हैं। टीम इंडिया की जीत के बाद उनकी आंखों में ‘खुशी के आंसू’ आ गए थे। फाइनल में श्रीलंका को हराने के आखिरी पलों को याद करते हुए तेंदुलकर ने कहा कि उन्होंने तब ईश्वर को धन्यवाद दिया, खुशी से चिल्लाए और ड्रेसिंग रूम से मैदान की तरफ दौड़े। तेंदुलकर कहते हैं, ‘जब मैं मैदान पर गया तब रो पड़ा। वह एकमात्र समय था जब मेरी आंखों में खुशी के आंसू आए क्योंकि वह एक अनमोल पल था। उस पल के बारे में आप बस सपने में सोच सकते थे।’