भारत के ये 4 गांव बिकाऊ, हर कोई छोड़ना चाहता है गांव

सुनील नागपाल, फाजिल्का (6 जुलाई): कारोबार की दुनिया में जमीन, खेत, मकान, दुकान बिक जाए तो गुलाबी अखबारों की सुर्खियां बन जाती हैं। लेकिन यहां तो गांव के गांव बिकने को तैयार हैं। कैराना की पलायन कथा पर कोहराम मचाने वाले जरा पंजाब के उन चार गांवों का हाल भी जान लें। जो अपनी मर्जी पर, बिना किसी दवाब के, अपना घर-बार बेचकर गांव छोड़ने को तैयार बैठे हैं। पंजाब के 4 गांवों के लोगों ने सेल का साइनबोर्ड टांग दिया है, हमारा गांव बिकाऊ है।

पंजाब में पाकिस्तान से सटा हिंदुस्तान का ये सरहदी इलाका है। फाजिल्का के इस इलाके में रोज बम गोलियों की बौछार होती है। लेकिन इनका सीना गोलियों से नहीं, फऱेबी नेताओं के झूठे वायदों से छलनी हुआ है। हर चुनाव में वायदों की पोटली खुल जाती है लेकिन होता कुछ नहीं है। इस बार ये इतने नाउम्मीद हुए हैं कि मकान खेत खलिहान बिकाऊ है का बोर्ड लगाकर आ गए हैं।

पंजाब में फाजिल्का के -केरियां गांव में फॉर सेल का बोर्ड -मुठियां वाली गांव बिकाऊ है -चानन वाला गांव बिकाऊ है -चुहड़ी वाला गांव बिकाऊ है

पंजाब में साढ़े नौ साल से अकाली दल-बीजेपी की सरकार है। गांव वाले आरोप लगाते हैं कि नहर में जो पानी आता भी है उसे अकाली नेताओं के करीबी अपने खेतों में मोड़ लेते हैं। यहां पानी पाने के लिए भी राजनीतिक रसूख चाहिए। गांव के लोग सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा लगा के हार गए। न नहर में पानी आया न बिजली कटौती रूकी। बंजर जमीन में कोंपलें तक नहीं फूटती। किसान करे तो करे क्या।

पाकिस्तान से सटा सरहदी इलाका है फाजिल्का। रात-दिन गोलियों की बौछार होती है। पानी है नहीं, बिजली आती नहीं। सरकारी स्कूलों में मास्टर फांकेबाजी करते हैं। सब मिलाकर जिंदगी की बत्ती गुल है। ऐसी गुल है कि इन गांवों में कोई अपनी बेटी देना नहीं चाहता। पंजाब के चार गांव बिकाऊ हैं, लेकिन शहर में बैठे कोतवालों को कहीं कोई समस्या नहीं दिखती। अकाली-बीजेपी सरकार खर्राटे भर रही है और अफसरों को हरियाली सूझ रही है।

किसानों की फूटी तकदीर देखिए इलाके के विधायक स्वास्थ्य मंत्री की कुर्सी पर विराजमान हैं और इलाका इतना बीमार है। चार-चार गांव बिकने को तैयार हैं अंधेर नगरी के मंत्री किसानों को ही झूठा बता रहे हैं।