गया था कर्ज माफी के लिए, पंचों ने मांग ली पत्नी की अस्मत

नई दिल्ली (22 जनवरी): पुराने समय से भारत में पंच को परमेश्वर का दर्जा दिया जाता रहा है। इसलिए जो लोग भी अपने वाद-विवाद लेकर पंचों के पालस जाते वो उनका फैसला परमेश्वर का फैसला समझ कर स्वीकर कर लेते थे। ...लेकिन महाराष्ट्र के परभणी में कर्ज में डूबा गांव बदर किया गया एक शख्स जब अपना मामला पंचों के पाल पहुंचा तो पंचो ने ऐसा फैसला सुनाया कि उसके पैरों के नीचे की जमीन ही खिसक गयी। पंचों के फैसले से पीड़ित पंचों के फैसले से मुक्ति के पाने के लिए पुलिस के पास जाना पड़ा। दरअसल, रामदीन काम्बली (परिवर्तित नाम) ने गांव के साहुकार से कुछ पैसे उधार लिए थे।

काम्बली कर्जा उतारने में नाकाम रहा। ब्याज बढ़ते-बढ़ते कर्ज छह लाख रुपये हो गया। कर्ज माफी के लिए काम्बली पंचों की शरण में गया। पंचों ने उसका मामला सुना और फैसला दिया कि अगर वो अपनी पत्नी एक रात के लिए पंचों के हवाले कर दे तो उसका कर्ज माफ कर दिया जायेगा। पंचों के फैसले से हतप्रभ काम्बली पुलिस की शरण में पहुंचा। पुलिस ने महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति की मदद से काम्बली का मामला सुलझाया और उसका गांव से बहिष्कार समाप्त करवाया।