विजया दशमी की एक अनसुनी कहानी-जब राम चले अपना एक नेत्र अर्पण करने !

नई दिल्ली (30 सितंबर): दशहरा को भगवान श्रीराम की विजय के रूप में मनाया जाता है। कहा जाता है कि जब रावण सीता का हरण कर उन्हें अपने साथ लंका ले गया था तो भगवान राम ने लंका पर विजय हासिल करने और सीता को वापस लाने के लिए चंडी देवी को प्रसन्न करने की ठानी। वहीं दूसरी ओर रावण ने विजय हासिल करने के चक्कर में चंडी देवी को प्रसन्न करने की ठानी। इंद्र देव ने ये बात जैसे जैसे भगवान राम तक पहुंचा दी, लेकिन चंडी पाठ के बीच में बाधा डालना सही नहीं था। वहीं दूसरी और रावण ने चाल चलते हुए अपनी शक्ति से श्रीराम के पूजा स्थल से एक नीलकमल गायब कर दिया। इससे राम का संकल्प टूटता सा नजर आने लगा। अब नीलकमल लाएं तो लाएं कहां से। बिना वक्त गंवाए श्रीराम ने ठाना कि वो अपना नेत्र ही अर्पित कर देंगे और जैसे ही उन्होंने अपना नेत्र निकालने के लिए तीर उठाया चंडी देवी प्रकट हो गईं और कहा कि वो राम की तपस्या से प्रसन्न हैं। चंडी देवी ने भगवान राम को विजय का आशीर्वाद दिया और अंतर्ध्यान हो गईं। इसके बाद राम ने रावण और उसकी नगरी पर विजय हासिल करने के लिए युद्ध छेड़ा और वानर सेना की मदद से युद्ध लड़ा। वो युद्ध 9 दिनों तक चला और 10वें दिन रावण को मार लंका पर विजय हासिल की। साथ ही देवी सीता को भी वापस ले आए। तभी से ये विजयादशमी का त्योहार मनाया जाता है।