खेलमंत्री विजय गोयल ने कहा, 'जैशा मामले से हमारा कोई लेना देना नहीं'

नई दिल्ली (22 अगस्त): रियो ओलंपिक में भारतीय मैराथन ओपी जैशा के खुलासे के बाद भारतीय खेलमंत्री विजय गोयल इस मामले से पल्ला झाड़ते दिखे। मीडिया में दिए अपने बयान में उन्होंने कहा कि भारतीय अधिकारियों को भेजने का काम फेडरेशन का है हमारा नहीं। इसलिए इस मामले में हम दोषी नहीं है।

जैशा के खुलासे के बाद मीडिया के सामने आते हुए विजय गोयल ने कहा कि ओलंपिक में अधिकारियों को भेजने का काम एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (AFI) करती है। इसलिए इस मामले को लेकर खेल मंत्रालय पर उंगली उठाना सही नहीं है। हालांकि, हम जैशा के बयान के आधार पर मामले की जांच करेंगे। 

विजय गोयल ने कहा, "हर बार जब भी ऐसी छोटी सी घटना होती है, हम इसपर ध्यान देते हैं। यह भारतीय ओलंपिक संघ (IOC) और  AFI का काम है। ये फेडरेशन हैं, जिन्हें इस सब बातों का ध्यान रखना होता है। फैसले लेने में इनका अहम रोल होता है।"

क्या है पूरा मामला

गौरतलब है, एथलीट जैशा को ये पता ही नहीं कि इस गड़बड़ी के लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाए। जैशा ने कहा, "मुझे नहीं पता कि इसके लिए किसे जिम्मेदार ठहराऊं। हो सकता है कि सी को भी मैराथन की गंभीरता का एहसास ना हो। लेकिन फैक्ट ये है कि हमें 42 किलोमीटर दौड़ना होता है।"

आपको बता दें, रियो ओलंपिक में भारतीय मैराथन रनर ने चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि ओलंपिक में उन्हें भारतीय अधिकारियों ने पानी तक उपलब्ध नहीं कराया। 

 "मैं वहां मर गई होती" ये कहना है रियो ओलंपिक में भाग लेने वाली निराश भारतीय मैराथन रनर ओपी जैशा का। जिन्होंने भारतीय अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें ओलंपिक में पानी और एनर्जी ड्रिंक्स तक नहीं उपलब्ध कराए गए, जबकि भारत के लिए अलग से स्टेशन्स दिए गए थे।

रियो ओलंपिक महिला मैराथन ईवेंट में 89वें स्थान पर रहने वाली जैशा ने कहा, "वहां बहुत गर्मी थी। प्रतियोगिता सुबह 9 बजे थी। मैं तेज गर्मी में दौड़ी। वहां हमारे लिए पानी भी नहीं था। ना ही रिकवरी ड्रिंक्स ना ही खाना। केवल 8 किलोमीटर पर एक बार ही रियो ओलंपिक आयोजकों की तरफ से हमें पानी मिलता था। जिससे हमारी पूरी तरह से हेल्प नहीं होती थी। हर देश ने हर 2 किलोमीटर पर अपने स्टॉल्स बनाए थे। लेकिन हमारे देश का स्टॉल खाली था।"