साउथ चाइना सी: भारत की चीन को नसीहत, धमकी नहीं शांति से सुलझाए मामला

नई दिल्ली (12 जुलाई): साउथ चाइना सी को लेकर जहां चीन अपनी बात पर अड़ा है, वहीं इस मामले में भारत ने भी अपना रुख साफ करते हुए उसे शांति से मामला सुलझाने की सलाह दी है। भारत ने कहा है कि इस मामले को बिना किसी धमकी और सैन्य ताकत दिखाए बिना शांति से हल किया जाना चाहिए।

विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया, कि "भारत का मानना है कि देशों को विवाद शांतिपूर्ण तरीके से निपटाना चाहिए। इसमें किसी तरह की धमकी या ताकत का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। इसकी जगह आत्मसंयम का अभ्यास होना चाहिए।"

इस मामले में भारत ने अपना पक्ष रखते हुए साफ कहा है कि वह UNCLOS में बताए गए सिद्धांतों और कानूनों के आधार पर फ्रीडम ऑफ नेवीगेशन और ओवर फ्लाइट के साथ बेरोक व्यापार का समर्थन करता है। 

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा, "साउथ चाइना सी से गुजरने वाली कम्यूनिकेशन लेन्स शांति, स्थायित्व, समृद्धि और विकास के लिए अहम हैं।" उन्होंने सभी पार्टियों से आग्रह किया कि UNCLOS के प्रति पूरा सम्मान प्रकट करें।

मामले में भारत संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की अगुवाई वाले ट्राइब्यूनल के मंगलवार को आए फैसले की स्टडी कर रहा है। इस मसले पर जब भारत का रिएक्शन पूछा गया तो सरकार के एक सीनियर ऑफिसर ने यह जानकारी दी। भारत की बेचैनी बढ़ी हुई है, क्योंकि भारत मानता है कि चीन जो साउथ चाइना सी में कर रहा है, वही वह चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) में भी कर रहा है। इस कॉरिडोर के बीच में आने वाले इलाके पर भारत अपना दावा करता है।

आपको बता दें कि साउथ चाइना सी में चीन के बढ़ते दखल को देखते हुए फिलीपींस ने इस मामले को इंटरनेशनल कोर्ट में उठाया था। जिसके बाद आज कोर्ट ने भी यह दलील दी कि चीन के पास ऐसा कोई प्रमाण नहीं है, जिसके आधार पर यह साबित किया जा सके कि इसपर चीन का हक है। जबकि चीन यहां के 90% हिस्से पर अपना दावा करता रहा है।

हालांकि चीन ने इंटरनेशनल कोर्ट की बात को मानने से इंकार कर दिया है। जिसको लेकर अमेरिका ने कहा है कि इंटरनेशनल कोर्ट का फैसला फैसला फाइनल है और चीन को इसे मानना ही होगा। इस केस में पिटीशन लगाने वाले फिलीपींस का आरोप था कि स्ट्रैटजिकली अहम माने जाने वाले इस इलाके में चीन ने रिसोर्सेस का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल किया है। 

इसलिए बढ़ा साउथ चाइना सी में तनाव - चीन ने धीरे-धीरे साउथ चाइना सी पर अपना कब्जा कर लिया था। - उसने वहां न केवल आर्टिफिशियल आइलैंड बना लिया, बल्कि बड़ी तादाद में आर्मी डिप्लॉय की। वहां हवाई पट्टी भी बना ली। - चीन के साउथ चाइना सी में दबदबे को लेकर अमेरिका भी लगातार विरोध करता रहा है। - बता दें कि चीन और अमेरिका दोनों ही साउथ चाइना सी में लगातार एक्सरसाइज करते रहते हैं।

कोर्ट ने इस आधार पर सुनाया फैसला - इंटरनेशनल कोर्ट ने अपने फैसले में यूएन कन्वेंशन ऑन लॉ ऑफ द सी (UNCLOS) को आधार बनाया। - 1982 में बने UNCLOS के मुताबिक, कोई भी देश अपनी टेरिटोरियल सोवेरिनटी बरकरार रखते हुए सामुद्री सीमा के अंदर एक्टिविटी कर सकता है। - UNCLOS के मुताबिक, आइलैंड में 12 नॉटिकल माइल की रेडियस में कोई भी देश अपनी एक्टिविटीज रख सकता है।  - फिलीपींस ने सुनवाई में कहा था कि एक्स्ट्रा 200 नॉटिकल माइल तक फिशिंग या दूसरी गतिविधियों की परमीशन दी जानी चाहिए।