South China Sea को लेकर चीन की दादागिरी खत्म, फिर भी सीनाजोरी जारी

नई दिल्ली (12 जुलाई): हेग स्थित इंटरनेशनल कोर्ट (कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन) ने साउथ चाइना डिस्प्यूट पर फैसला सुनाते हुए कहा कि चीन के पास कोई ऐसा ऐतिहासिक अधिकार नहीं है, जिससे वह यहां पर अपना हक जमाए। हालांकि चीन यहां के 90% हिस्से पर अपना दावा करता रहा है। फैसला आने के बाद चीन ने कहा कि हम हेग ट्राइब्यूनल के फैसले को नहीं मानते।

चीन का ये दावा करना कि साउथ चाइना सी के पानी पर उसका ऐतिहासिक हक है, कतई सही नहीं कहा जा। साउथ चाइना सी पर फिलीपींस ने चीन के खिलाफ पिटीशन दायर की थी। फिलीपींस का आरोप है कि स्ट्रैटजिकली अहम माने जाने वाले इस इलाके में चीन ने रिसोर्सेस का जरूरत से ज्यादा यूज किया है। हालांकि चीन ने सुनवाई से ये कहते हुए बायकॉट किया कि इस मुद्दे पर फैसला सुनाना हेग के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।

इसलिए बढ़ा साउथ चाइना सी में तनाव: - चीन ने धीरे-धीरे साउथ चाइना सी पर अपना कब्जा कर लिया है। - उसने वहां न केवल आर्टिफिशियल आईलैंड बना लिया बल्कि बड़ी तादाद में आर्मी डिप्लॉय की। वहां हवाई पट्टी भी बना ली। - चीन के साउथ चाइना सी में दबदबे को लेकर अमेरिका भी लगातार विरोध करता रहा है। - बता दें कि चीन और अमेरिका दोनों ही साउथ चाइना सी में लगातार एक्सरसाइज करते रहते हैं।

क्या है विवाद की असल वजह? - साउथ चाइना सी में तेल और गैस के बड़े भंडार दबे हुए हैं। - अमेरिका के मुताबिक, इस इलाके में 213 अरब बैरल तेल और 900 ट्रिलियन क्यूबिक फीट नेचुरल गैस का भंडार है। - इस समुद्री रास्ते से हर साल 7 ट्रिलियन डॉलर का बिजनेस होता है। - चीन ने 2013 के आखिर में एक बड़ा प्रोजेक्ट चलाकर पानी में डूबे रीफ एरिया को आर्टिफिशियल आइलैंड में बदल दिया। क्या है फ्रीडम ऑफ नेविगेशन? - इंटरनेशनल लॉ किसी भी देश को उनकी समुद्री सीमा से 12 नॉटिकल माइल तक के क्षेत्र में जाने का हक देता है। - उसके बाद इंटरनेशनल बॉर्डर का एरिया शुरू हो जाता है। - कोई भी देश इस सीमा के बाहर किसी एरिया पर दावा नहीं कर सकता।