मोटापा कम करने के नाम पर ऐसे ठगे गए थे उपराष्ट्रपति नायडू

नई दिल्ली (29 दिसंबर): भ्रामक विज्ञापन के जरिए कई कंपनियां धड़ल्ले से लोगों को चूना लगाती है। उप राष्ट्रपति वैंकेया नायडू भी एकबार ऐसे ही विज्ञापन से धोखा खा चुके हैं। एक बार वेंकैया नायडू मोटापा कम करने के नाम पर ठगे गए थे। इस बात का खुलासा खुद वेंकैया नायडू ने संसद में किया।   

दरअसल समाजवादी पार्टी सांसद नरेश अग्रवाल ने शुक्रवार को भ्रामक विज्ञापनों का मुद्दा उठाते हुए मंत्री से मामले में सफाई मांगी तो वेंकैया ने मंत्री के बोलने से पूर्व अपना एक वाक्या सुनाया। वजन कम करने वाले एक भ्रामक विज्ञापन के खेल से परदा हटाते हुए नायडू ने कहा कि वैसे तो उनका वजन कम हो गया है। मगर एक दिन उन्होंने विज्ञापन देखा, जिसमें 28 दिन में वजन कम होने का दावा किया गया था। कैपसूल खाने से वजन कम करने का विज्ञापन था। उन्होंने उक्त विज्ञापन की साईट पर जाकर उसके खरीद की प्रक्रिया शुरू की। तो पहले था कि 150 रूपया देकर कैपसूल प्राप्त की जा सकती है। जब उन्होंने 150 रुपए का पेमेंट कर दिया तो संदेश आया कि 1000 रुपए जमा करने पर ज्यादा प्रभावी दवा मिलेगी।

नायडू ने बताया कि विज्ञापन की तह तक जाने के लिए उन्होंने अपने स्टाफ से 1000 रुपए जमा करवाया, मगर दवा नहीं आई। बतौर नायडू उन्होंने इस भ्रामक विज्ञापन की शिकायत पत्र के जरिए उपभोक्ता एवं संरक्षण मंत्रालय को भेजी। मंत्रालय की ओर से जवाब आया कि यह कंपनी भारत से नहीं बल्कि अमेरिका से संचालित होती है, इसलिए इसपर हाथ बंधे हैं। अपना वृतांत सुनाने के बाद नायडू ने विभाग के मंत्री रामविलास पासवान से कहा कि वे इस मामले में कड़ा कदम उठाएं। ताकि आम उपभोक्ता के हित को संरक्षित किया जा सके।