जानें, मोदी ने नायडू को क्यों बनाया उप-राष्ट्रपति उम्मीदवार ?

नई दिल्ली (18 जुलाई): बीजेपी ने शहरी विकास मंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता वेंकैया नायडू को उप-राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया है और आज वो अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। ऐसे में सवाल उठता है कि बीजेपी ने अपने तेज-तरार और संकट मोचक कहे जाने वाले वरिष्ठ नेता को उप-राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के लिए क्यों चुना।

दरअसल वेंकैया नायडू संघ के बेहद करीबी हैं ऐसे में पीएम मोदी को उम्मीद है कि वो संघ और सरकार के BJP एक कड़ी काम करेंगे। बीजेपी चाहती है कि उप राष्ट्रपति पद पर बैठने वाला शख्स ऐसा हो जो राज्यसभा के सियासी समीकरण को संभाल सके, क्योंकि वहां पर बीजेपी कमज़ोर है। राज्यसभा में आंकड़ों के खेल में BJP पीछे पड़ जाती है। ऐसे में उनका राजनीतिक कौशल और उनका कद्दावर व्यक्तित्व सदन चलाने में काम आ सकता है। नायडू 4 बार राज्यसभा के सदस्य रहे हैं। उनका 25 साल से लंबा संसदीय कार्य का अनुभव है। पीएम मोदी ने वेंकैया की उम्मीदवारी पर ट्वीट करते हुए कहा है कि मैं वेंकैया गारू को सालों से जानता हूं, उनकी कड़ी मेहनत का हमेशा मुरीद रहा हूं, उप राष्ट्रपति पद के लिए सबसे योग्य उम्मीदवार हैं, किसान के बेटे वेंकैया नायडू की प्रशासनिक कुशलता की सभी तारीफ करते हैं।

वेंकैया नायडू इंग्लिश, हिंदी, तेलगू, तमिल समेत कई भाषाएं जानते हैं। अक्सर देखा गया है कि चाहे सरकार हो या पार्टी हो उसमें कोई भी तकनीकी विषय आता है या कोई संकट आता है तो वो लगातार अच्छा प्रदर्शन करते हैं। शायद इसीलिए मोदी सरकार में उनकी भूमिका एक संकटमोचक की तरह देखी जाती है। वेंकैया ने कई बार पार्टी और सरकार को संकट से निकालने में बेहद अहम भूमिका निभाई है।

इतना ही नहीं BJP की रणनीति है कि उत्तर भारत से राष्ट्रपति के बाद उपराष्ट्रपति दक्षिण भारत का हो, जिससे वहां भी कमल खिलाने का रास्ता आसान हो सके, और इसके लिए वेंकैया नायडू से बेहतर और कोई नहीं हो सकता था।  इस निर्णय के जरिए भी BJP अपने लिए दक्षिण में संभावना तलाशने की कोशिश करेगी।

आंध्रप्रदेश के नेल्लोर जिले के रहने वाले वेंकैया नायडू बीजेपी में शामिल होने से पहले 70 के दशक में RSS और ABVP में उल्लेखनीय योगदान दे चुके हैं। आपातकाल के दौरान वो जय प्रकाश नारायण के आंदोलन से जुड़े थे और उस समय वो जेल भी गये थे। 1978 और 1983 में नेल्लौर से विधायक चुने के बाद वो पहली बार 1998 में राज्यसभा सांसद बने। अभी वो राजस्थान से राज्यसभा सांसद है और मोदी सरकार में उनकी भूमिका एक संकटमोचक के तौर पर हैं।