स्कूलों की फरमान बच्चों को सिर्फ दे शाकाहारी भोजन वाला टिफ़िन

भूपेंद्र सिंह, अहमदाबाद (22 अप्रैल): यूं तो स्कूलों में बच्चों को अधिकार के लिए लड़ने की प्रेरणा दी जाती है। लेकिन इन्हीं स्कूलों ने बच्चों के टिफ़िन को लेकर भेदभाव की नीति अपनाई जा रही है। हिन्दू बाहुल्य इलाकों में स्थित तक़रीबन सभी स्कूलों में बच्चों के टिफ़िन में मासाहारी भोजन या नाश्ता लाने पर सख्त पाबन्दी है।


तक़रीबन सभी स्कूलों में मौखिक तौर पर ये फरमान जारी कर सभी अभिभावकों को साफ़ तौर पर हिदायत दी गई

है कि वो बच्चो को सिर्फ शाकाहारी भोजन वाला ही टिफ़िन दें। टिफ़िन को लेकर कोई भी सरकारी अधिसूचना या पाबन्दी न होने के बावजूद ऐसे तुगलकी फरमान को ज्यादातर स्कूल ने मौखिक हिदायत देकर ही अमलीजामा पहनाया है, जिसके पीछे इनकी दलील है कि स्कूल में बच्चे ज्यादातर समूह में बैठकर खाते है और हिन्दू छात्र ज्यादा होने के चलते मासाहारी नाश्ता उनमें असमंजस की स्थिति पैदा कर देता है।


हालांकि ज्यादातर अभिभवाक को इस बात से बहुत ज्यादा आपत्ति नहीं है। स्कूल प्रशाशन की मानें तो अभिभवाक शाकाहारी भोजन के लिए बच्चों को प्रेरित करते है। कई स्कूल ऐसी भी है जो खुद ही नाश्ता उपलब्ध कराते हैं, वो भी शाकाहारी ही होता है।