पहली बार काशी में किए जाएगा हिंदू किन्नरों का पिंडदान

लखनऊ (11 अगस्त): वाराणसी में इतिहास बदलने जा रहा है। यहां जल्द ही किन्नर समुदाय के लोगों के सामूहिक पिंड दान होगा। इस कार्यक्रम की कोशिश नए बने किन्नर अखाड़ा ने की है। यह कार्यक्रम पितृ पक्ष में आयोजित किया जाएगा।

इस साल सितंबर महीने में पितृ पक्ष मनाया जाना है। मालूम हो कि किन्नर समुदाय के लोगों का अंतिम संस्कार पारंपरिक हिंदू पद्धति से नहीं किए जाने की प्रथा चली आ रही है। कार्यक्रम का ब्योरा देते हुए किन्नर समूह के महामंडलेश्वर (प्रमुख) लक्ष्मी त्रिपाठी ने बताया, 'हम 3 सदी पुरानी परंपरा तोड़ने जा रहे हैं। इस प्रथा के तहत हिंदू धर्म में जन्मे किन्नरों से एक सम्मानजनक मौत का अधिकार छीन लिया जाता था।'

त्रिपाठी ने आगे बताया कि मरने के बाद किन्नरों को दफनाने की रस्म मुगलकाल में शुरू हुई। किन्नर अखाड़ा की नींव रखने वाले सदस्यों में शामिल ऋषि अजय दास ने बताया, 'एक हिंदू को जन्म, अन्न प्राशन, विवाह जैसे 16 संस्कार करने होते हैं। मरने के बाद मृतक की अंत्येष्टि और उससे जुड़ी रस्मों को पूरा करना मोक्ष पाने के लिए जरूरी समझा जाता है। दफनाने की रस्म के कारण हिंदू धर्म में जन्मे किन्नरों को सम्मान से मरने का अधिकार भी नहीं मिलता था। यह सामूहिक पिंडदान उन सभी के अंतिम संस्कार रीति-रिवाज से पूरे करने की हमारी एक कोशिश है।'

यह आयोजन 24 सितंबर को होना है। 151 ब्राह्मणों का एक समूह यह पिंडदान कराएगा। महामंडलेश्वर लक्ष्मी ने बताया कि

जोशी मठ के प्रमुख भी इस मौके पर अपना आशीर्वाद देने के लिए पहुंच सकते हैं।