जयगुरुदेव कार्यक्रम में भगदड़ से मरने वालों की तादाद 25 हुई

 नई दिल्ली(15 अक्टूबर): वाराणसी में जय गुरुदेव के कार्यक्रम में भगदड़ मचने से 22 लोगों की मौत हो गई, जबकि 5 घायल हो गए। मरने वालों में 18 महिलाएं और 4 पुरुष शामिल हैं।

ये घटना राजघाट पुल पर हुई। भगदड़ के बाद डीजीपी दिल्ली से लखनऊ के लिए रवाना हो गए है। जानकारी के मुताबिक पुल पार करते समय भगदड़ मची। राहत और बचाव का काम जारी है। 

राजघाट पुल

राजघाट पुल बिहार, झारखण्ड, मध्य प्रदेश को बनारस से जोड़ता है। चंदौली, मिर्जापुर, सोनभद्र जैसे जिलों से आने का भी यह रास्ता है। इस पर हर वक्त ढेरों लोगों का आना- जाना होता है।

बूढ़ा हो गया राजघाट का पुल

- राजघाट पुल का निर्माण ब्रिटिश शासन काल में हुआ था.

- उस वक्त डफरिन ब्रिज के नाम से जाने जाना वाला इस सेतु को अवध और रुलेहलखण्ड रेलवे कम्पनी के इंजीनियर्स ने बनाया था.

- भारतीय महाद्वीप में अपने तरह तरह का यह पहला पुल एक अक्टूबर क्887 को यातायात के लिए चालू किया गया.

- इसमें सात मुख्य और नौ अन्य स्पैन हैं।

- बाद में इसका नाम बदलकर मालवीय सेतु कर दिया गया.

- पुल की उम्र पूरी हो चुकी है लेकिन इसे मरम्मत के सहारे चलाया जा रहा है.

- भारी वाहन का इस पर चलना इसकी सुरक्षा के लिए बेहद खतरनाक है.

सवा सौ साल से भी पुराने पुल की रेलिंग जर्जर हो चुकी है.

- किसी वाहन के जरा से धक्के से टूटकर गिर पड़ती है रेलिंग.

- वाहनों के धक्के से पुल और लिंक रोड की रेलिंग जगह- जगह टूटी पड़ी है.

- बेहद व्यस्त रहने वाले पुल पर रात में रोशनी का इंतजाम लगभग नहीं जैसा है.

- बूढ़े हो चुके पुल पर बड़े या भारी वाहनों के रोक के बावजूद आना- जाना जारी है.

- बड़े वाहनों को रोकने के लिए पुल के दोनों छोर पर लगाए बैरियर को तोड़ दिया गया है.

- अक्सर तेज रफ्तार में दौड़ती गाडि़यां रेलिंग तोड़कर कभी गंगा में तो कभी रेलवे के हाईटेंशन तार पर या कई फुट नीचे गहराई में गिरती हैं.

- पुल के स्लीपर के बीच में बड़े- बड़े गैप बन चुके हैं.

- नीव कमजोर पड़ चुकी है और सपोर्ट करने वाले गार्डर जर्जर हो गए हैं.