वंदे भारत एक्सप्रेस: गति, तकनीक, और हाई-फाई सुविधाओं से लैस एक आरामदायक सवारी

उत्कर्ष अवस्थी, न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली(19 अगस्त): नई दिल्ली से वाराणसी और के बीच चलाई गई वंदे भारत एक्सप्रेस आज यात्रियों के लिए एक नया और बेहद सुखद अनुभव है। यह ट्रेन जिधर से भी गुजरती है लोगों में इसे देखने का कौतूहल होता है और ट्रैक के किनारे लोग तस्वीरें उतारते और विडियो बनाते नजर आते हैं। इस ट्रेन में सुविधाएं वर्ल्ड क्लास हैं। साफ-सफाई के मामले यात्रियों ने अच्छा फीडबैक दिया है। ट्रेन के सभी कोच में एक सुपरवाइजर होता है जिसके अंडर में दो सफाईकर्मी काम करते हैं। 

नई दिल्ली से प्रयागराज की यात्रा का मेरा अनुभव किसी सुहाने सपने जैसा रहा। सबसे अच्छी बात जो इस ट्रेन को बाकि अन्य गाड़ियों से अलग बनाता है वो है इसकी साफ़ -सफाई। वंदे भारत एक्सप्रेस के वॉशरूम में बायोटॉइलट है जिसकी सफाई समय-समय पर होती रहती है। अगर किसी की सीट के पास गंदगी होती है तो ट्रेन में लगे वाई-फाई से 'ट्रेनमीडिया' पर जाकर हाउस कीपिंग स्टाफ को बुलाया जा सकता है। यात्री भी ट्रेन की सुविधाओं को देखते हुए आम ट्रेनों की तरह कूड़ा-कचरा जहां-तहां नहीं फेंकते। इसमें डस्टबिन की सुविधा भी दी गई है जिसका लोग उपयोग करते दिखाई दिए।

इस खास ट्रेन में मिलने वाले नाश्ते और खाने की गुणवत्ता अच्छी है। नई दिल्ली से ट्रेन छूटने के बाद पहले यात्रियों को अखबार दिया जाता है। अपनी पसंद के मुताबिक हिंदी या अंग्रेजी मे अखबार लिया जा सकता है। इसके बाद चाय और बिस्किट सर्व किया जाता है। चाय की गुणवत्ता बहुत ही अच्छी है। ट्रेन में दिए जाने वाले नाश्ते की भी गुणवत्ता अच्छी है और इसकी पैकिंग भी अच्छी की गई है जिससे खाने में सुविधा होती है। ट्रेन में निर्धारित मात्रा में मिलने की वाली चाय के अलावा अगर किसी को अतिरिक्त चाय या नाश्ते की जरूरत होती है तो 'ट्रेन मीडिया' में जाकर ऑर्डर किया जा सकता है। इसके लिए पैसे अलग से देने होंगे और यह जरूरत तभी पूरी हो सकेगी अगर सभी को सर्व किए जाने के बाद सामग्री बची हुई है।

वंदे भारत की स्पीड शानदार है और वाराणसी तक बीच में केवल दो ही स्टॉप हैं। यह ट्रेन अधिकतम 131 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से चलती है। ट्रेन की गति में सबसे बड़े बाधक जानवर हैं। इसमें स्पीड ज्यादा होती है और आवाज कम होती है। ऐसे में अकसर ट्रैक पर जानवर आकर कट जाते हैं। इसके बाद ट्रेन को रोककर इसका पूरा मुआयना करना पड़ता है। दिन में ऐसी घटनाओं की संभावना कम होती है लेकिन वाराणसी से दिल्ली आते वक्त अकसर ऐसा हो रहा है।

हालांकि ट्रेन की सीटें थोड़ी और आरामदायक हो सकती थीं। बुजुर्गों के लिए छह से सात घंटे तक सीधे बैठना मुश्किल होता है। एग्जिक्यूटिव क्लास की सीटों को घुमाने की सुविधा तो है लेकिन इन्हें भी झुकाया नहीं जा सकता है। हालांकि सीटों के आगे पर्याप्त जगह है इसलिए बैठने में ज्यादा असुविधा नहीं होती है। सभी कोच में स्वचालित दरवाजे, जीपीएस आधारित दृश्य-श्रव्य यात्री सूचना प्रणाली, मनोरंजन के उद्देश्य से ट्रेन के अंदर हॉटस्पॉट वाईफाई है। सभी शौचालय बायो-वैक्यूम किस्म के हैं। डिब्‍बों में दो प्रकार की प्रकाश सुविधा दी गई है, एक सभी यात्रियों के लिए सामान्‍य प्रकाश की सुविधा और हर सीट पर अलग से प्रकाश की व्‍यवस्‍था भी है। इसमें 16 वातानुकूलित कोच हैं जिनमें दो एक्जीक्यूटिव श्रेणी के हैं. ट्रेन में कुल 1,128 यात्रियों के बैठने की क्षमता है। कोचों और ड्राइविंग कोच में सीटों के नीचे बिजली के सभी उपकरणों को रखने के कारण इस ट्रेन में उतनी संख्या की कोच वाली परंपरागत शताब्दी रेकों से कहीं अधिक सीटें है। इस ट्रेन की यात्रा ने मुझे भारतीय रेल के अंग्रेजी में लिखे जाने वाले 'suffer'  को हिंदी के सुहाने सफर में तब्दील कर दिया। गति, तकनीक, सुविधायें, सुरक्षा के साथ बेहतरीन और आरामदायक यात्रा का अनुभव करने के लिए एक बार वंदे भारत एक्सप्रेस की यात्रा जरूर करें।