जानिए, कश्मीर में खूनखराबे के पीछे की 'हिडेन स्टोरी'

अमित कुमार, नई दिल्ली (15 जुलाई): घाटी आतंकी बुरहान के एनकाउंटर के बाद से सुलग रही है। कई बार सेना पर पत्थरबाजी की गई। और ऐसा आए दिन हो रहा है। इस पत्थरबाजी के पीछे है एक नापाक साजिश। पाकिस्तान का मंसूबा है किसी तरह से अमरनाथ और वैष्णो देवी यात्रा को रोका जाए। जिससे घाटी में हिंदुओं का आना-जाना कम हो और इसके लिए पाकिस्तान का हथियार बने हैं कश्मीर के युवा घाटी में हो रही इस पत्थरबाजी के पीछे है बहुत बड़ी साजिश। 

कश्मीर में इस हिंसा के पीछे है पाकिस्तान का नापाक इरादा 

जवानों पर हो रहे इस आत्मघाती हमलों के पीछे है आतंकवादियों का खौफनाक मकसद। जम्मू कश्मीर में हो रही इन सारी घटनाओं का ताल्लुक है अमरनाथ यात्रा और वैष्णों देवी यात्रा से। इन घटनाओं के पीछे आतंकवादी तो हैं ही लेकिन आतंकवादियों को मदद करने वाला पाकिस्तान भी है और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI भी। 

सूत्रों से खबर है कि पाकिस्तान सरकार, आईएसआई और आतंकवादियों ने जम्मू कश्मीर को भारत से अलग करने का नया प्लान बनाया है। इस प्लान में अमरनाथ यात्रा और वैष्णों देवी यात्रा को प्रभावित करना है।

पाकिस्तान का मकसद है घाटी में इतनी दहशत फैलाई जाए ताकि अमरनाथ यात्रा और वैष्णों देवी यात्रा प्रभावित हो। श्रद्धालु यात्रा में आने से डरें। मतलब ISI आतंकवादियों के साथ मिलकर कश्मीर और भारत का धार्मिक कनेक्शन काटना चाहता है, ताकि हिंदुओं का जम्मू कश्मीर से कोई नाता ना रह पाए। 

आतंकवादियों के निशाने पर हमेशा से वैष्णों देवी यात्रा और अमरनाथ यात्रा रहती है। आतंकवादियों ने  कई बार श्रद्धालुओं पर हमला करने की नापाक कोशिश भी की है। लेकिन सुरक्षाबलों की मुस्तैदी ने कई हमलों को नाकाम किया।

2003 में कटरा में वैष्णो देवी जा रहे श्रद्धालुओं पर हमला किया हमले में 7 श्रद्धालुओं की मौत हुई  2002 में अमरनाथ श्रद्धालुओं पर हमला हुआ हमले में 10 लोग मारे गए 2001 में हुए हमले में 12 लोगों की हत्या 2000 बेस कैंप पर हमला, 25 लोगों की मौत 

हालांकि सुरक्षा बलों की मुस्तैदी के कारण ही पिछले 10-12 सालों से आतंकवादी अमरनाथ और वैष्णों देवी जाने वाले श्रद्धालुओं पर किसी हमले को अंजाम नहीं दे पाए। यही वजह है कि अब ISI की शह पर आतंकवादी और भटके हुए नौजवान कश्मीर में  हिंसा फैलाते हैं। हमले का मकसद तीर्थ यात्रियों में दहशत फैलाना ताकि देश के दूसरे हिस्सों से लोग यहां ना आएं। इसलिए पिछले 2 सालों से घाटी में पत्छरबाजी की घटनाएं ज्यादा बढ़ गई हैं।

ISI और आतंकवादी भारत और कश्मीर का धार्मिक कनेक्शन काटने के लिए ज्यादातर हिंसा गर्मियों के महीनों में करते हैं। गर्मियों के महीनों में ही अमरनाथ यात्रा और वैष्णो देवी यात्रा शुरू होती है। और इसी वक्त घाटी में हिंसा होने की वजह से श्रद्धालु कम होते जा रहे हैं।

वैष्णो देवी यात्रा में कम हो रहे हैं श्रद्धालु 
साल 2012 में 104 लाख श्रद्धालु पहुंचे साल 2013 में श्रद्धालुओं की संख्या 93 लाख  साल 2014 में 78 लाख श्रद्धालुओं ने यात्रा की साल 2015 में 77 लाख श्रद्धालुओं ने यात्रा की

इन आंकड़ों से साफ है घाटी में होने वाले तनाव की वजह से साल दर साल श्रद्धालुओं की संख्या कम होती जा रही है। और आईएसआई और आतंकवादी अपने मकसद में कामयाब होते दिख रहे हैं। हांलाकि जम्मू कश्मीर के लिए सबसे बड़ी कमाई का जरिया ही टूरिज्म है। आईएसआई और आतंकवादी लोगों को भड़का कर टूरिज्म तो कम करवाने की कोशिश करते हैं। लेकिन भटकने वाले लोग ये नहीं समझते कि इन्हीं टूरिस्टों की वजह से यहां रहने वाले ज्यादातर लोगों की रोजी रोटी चलती है।