उत्तराखंड के हालात जानकर सहम जाएंगे आप...

वरुण सिन्हा, नई दिल्ली (3 जुलाई): तीन दिन पहले उत्तराखंड के पहाड़ों पर जो कयामत आई थी, बादल फटा, पहाड़ टूटा। नदियां खतरे के निशान को पार कर गईं। 48 घंटे से लगातार हो रही बारिश ने राहत और बचाव के काम में भी अड़ंगा लगा दिया, लेकिन उत्तराखंड में जिंदगियों को बचाने का सिलसिला नहीं थमा है। 

न्यूज 24 की टीम पिथौरागढ़ के ग्राउंड जीरो के लिए निकली तो देखा कि लैंडस्लाइड की वजह से सड़कें जगह जगह से टूटी पड़ी थीं। कई जगह लोग 24 घंटे से जाम में फंसे हुए थे। न खाने का कोई इंतजाम है ना पीने के पानी का, रास्तों को खोलने में सेना और NDRF की टीमें जुटी हुई हैं।

तीस जून और एक जुलाई की दरम्यानी रात आसमान से जो कयामत आई। उसने पिथौरागढ और चमोली के कई गावों को बर्बाद कर दिया। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में, कुदरत ऐसी रूठी कि गांव के गांव सिरे से गायब हो गए। पहाड़ों पर दूर दराज बसे जिन गांवों में 25 से 30 घर हुआ करते थे, अब दो या चार बचे हैं।

जगह जगह दरके पहाड़ों ने सड़कों पर मुसाफिरों का रास्ता रोक रखा है। लेकिन सेना, राज्य पुलिस, भारत तिब्बत सीमा पुलिस, एनडीआरएफ और एनडीआरएफ के जवान भी कुदरत से लोहा ले रहे हैं। सड़कें टूटती रहीं, रास्ते बनते गए और हम बढ़ते गए लेकिन पिथौरागढ़ के ग्राउंड ज़ीरो से करीब 90 किलोमीटर पहले पहाड़ ने सड़क को पूरी तरह बंद कर दिया। दरकते पहाड़ों की गोद में बरसते आसमान के नीचे ठंड में ठिठुरते लोग 24 घंटों से जाम में फंसे हैं। छोटे बच्चों के लिए न खाने का इंतजाम है, न दूध का पहाड़ी घुमावदार सड़कों पर जाम कई किलोमीटर तक लग गया। 

बारिश अभी थमी नहीं है, तबाही अभी रुकी नहीं है। पहाड़ पर जिंदगी की हर रोज की कठोर लड़ाई भी जारी है। रास्ते फिर से बनेंगे, घर फिर से बसेंगे।