उत्तराखंड में आग का पता लगाएगा ड्रोन

कमल जगाती, रामपुर (24 अप्रैल): उत्तराखंड में हर साल हजारों हेक्टेयर जंगल आग की वजह से बर्बाद हो जाता है। जंगलों में लगने वाली इस आग से बड़ा नुकसान होता है, कई जानवर मर जाते हैं। ऐसे में अब आग का पता लगाने के लिए सरकार ड्रोन की मदद लेगी और इसकी शुरुआत भी हो चुकी है।


उत्तराखंड के जंगलों की आग पर नजर रखने के लिए अब सेटेलाइट का ही नहीं ड्रोन का सहारा भी लिया जाएगा। वन मंत्री हरक सिंह रावत की मौजूदगी में इसका पहला टेस्ट किया गया। रामनगर वन क्षेत्र में ड्रोन की मदद से ये देखा गया कि कहां-कहां आग लगी है। आने वाले वक्त में इस ड्रोन कैमरे से बड़ी सफलता मिल सकती है। गर्मियों के दिनों में जंगलों की आग बेकाबू हो जाती है। इस बार करीब 2 लाख हैक्टेयर वन क्षेत्र के संवेदनशील इलाकों में तीन ड्रोन से निरीक्षण का काम शुरु कर दिया गया है। 


इससे जंगल को आग से बचाने की उम्मीद काफी बढ़ गई। उत्तराखंड में कई इलाके आग की दृष्टि से काफी संवेदनशील हैं। वन विभाग पारंपरिक और सेटेलाइट की मदद से आग की रोकथाम की कोशिश करता है, लेकिन तराई इलाकों में जंगल की आग का आसानी से पता नहीं लगता। इसलिए लगातार निगरानी रखने के लिए पहली बार ड्रोन का सहारा लिया जा रहा है। ड्रोन से नजर रखने के लिए तीन पायलटों को रखा गया है। इनसे मिली तस्वीरों को हल्द्वानी स्थित कंट्रोल सेंटर में मॉनिटर किया जाएगा। 


उत्तराखंड में अब तक 238 आग की घटनाओं में 333.34 हैक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है, लेकिन ड्रोन की मदद से इन घटनाओं को रोकने की कोशिश की जाएगी। ये ड्रोन जसपुर, काशीपुर, बाजपुर, रामनगर, कालाढूंगी, हल्द्वानी, खटीमा, सितारगंज, बनबसा और किच्छा समेत पहाड़ के कुछ संवेदनशील हिस्से का दिन रात निरीक्षण करेगा।