योगी आदित्यनाथ और रामजन्म भूमि-बाबरी मस्जिद विवाद का संबंध!


प्रभाकर मिश्रा, नई दिल्ली(4 अप्रैल): आजकल जब चारों ओर चर्चा योगी यानि यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ही हो रही है तो ये भी जानना दिलचस्प होगा कि रामजन्म भूमि - बाबरी मस्जिद विवाद से भी योगी का सम्बन्ध है। और इस सम्बन्ध को जानने के लिए न तो न किसी मध्यकालीन इतिहास की मोटी किताबों में घुसने की जरूरत है ना ही कानूनी दस्तावेज पलटने की।

   

- योगी आदित्यनाथ जिस गोरक्षनाथ मठ के महंत हैं उसके संस्थापक मत्स्येंद्र नाथ थे जिन्हें नाथ पंथी मछंदर कहते हैं। मत्स्येंद्र नाथ ने ही नाथ सम्प्रदाय की स्थापना की थी।


- उनकी गिनती देश के 84 सिद्धपुरुषों में की जाती है। मत्स्येंद्र नाथ के प्रिय शिष्य थे गोरखनाथ। गोरखनाथ के नाम पर ही गोरखपुर शहर का नाम रखा गया है।


- योगी आदित्यनाथ के गुरु महंत अवैद्यनाथ थे और उनके गुरु थे दिग्विजय नाथ। दिग्विजय नाथ उदयपुर के रहने वाले थे और अनाथ थे। दिग्विजय नाथ 1894 में पैदा हुए और लालन पालन गोरक्षनाथ मठ में ही हुआ। दिग्विजय नाथ 1921 में कांग्रेस में शामिल हुए लेकिन बाद में अलग हो गए। आजादी की लड़ाई में हिस्सा लिया। 1922 में हुए 'चौरी चौरा' कांड में सक्रिय भागीदारी के आरोप में जेल भी गए। बाद में हिन्दू महासभा में शामिल हो गए।


- हिन्दू महासभा महात्मा गांधी के विचारों का विरोध करती थी, दिग्विजय नाथ भी महात्मा गांधी के खिलाफ हो गए। महात्मा गांधी की हत्या से तीन दिन पहले दिग्विजय नाथ ने बयान दिया था कि 'गांधी जो कुछ कर रहा है, उसके लिए उसकी हत्या कर देनी चाहिए।' गांधी जी की हत्या के बाद उनको गिरफ्तार कर लिया गया और वह नौ महीने तक जेल में रहे।


- दिग्विजय नाथ बेहद दूरदर्शी थे। उन्होंने 1949 यानि देश की आज़ादी के दो साल के भीतर ही भांप लिया था कि एक दिन देश में राम जन्मभूमि के मुद्दे पर राजनीति गरमाएगी।


- दिग्विजय नाथ अखिल भारतीय रामायण महासभा में शामिल हो गए और बाबरी मस्जिद के सामने 9 दिनों तक रामचरित मानस का पाठ रख दिया। जिस दिन पाठ की समाप्ति होनी थी, उसी रात अचानक मस्जिद के अंदर 'रामलला' की मूर्तियां पहुंच गयीं ..अयोध्या विवाद की नींव रखी जा चुकी थी।