दूध से वंचित बच्चों के लिए नई पहल: राज्य में जल्द खुलेगा पहला मदर मिल्क बैंक

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली( 17 जुलाई): बच्चे के लिए मां का दूध किसी अमृत से कम नहीं होता है। अब किसी भी बच्चे को मां के दूध से वंचित नहीं रहना पड़ेगा। यह संभव होगा बीएचयू अस्पताल में बनने वाले प्रदेश के पहले मदर मिल्क बैंक की बदौलत। यह दूध बैंक माडर्न मैटरनल एंड चाइल्ड हेल्थ विंग में बनाया जाएगा।इस पर अस्पताल के अफसरों के साथ एनएचएम व सहयोगी संस्था के अधिकारियों से बात हो चुकी है। भवन का निर्माण कार्य चल रहा है। एमसीएच विंग की इंचार्ज प्रो. मधु जैन ने बताया कि यह मिल्क बैंक प्रसूताओं की काउंसिलिंग भी करेगा, ताकि उन्हें बच्चों को स्तनपान कराने के प्रति प्रोत्साहित किया जा सके। उन्होंने बताया कि इस पहल का फायदा शिशु मृत्युदर में कमी के रूप में सामने आएगा। मां के दूध में मौजूद पोषक तत्व नवजातों को बीमारियों व संक्रमण से भी बचाते हैं। प्रो. जैन ने बताया कि आशा और एएनएम की मदद से गांव-गांव तक यह बात पहुंचाई जाएगी कि मां का दूध शिशु के लिए कितना जरूरी है।

दूध रहेगा 6 माह तक सुरक्षित 

मदर मिल्क बैंक में इलेक्ट्रिक पंप होता है। इससे डोनर से दूध एकत्र किया जाता है। इस दूध का माइक्रोबायोलॉजिकल टेस्ट होता है। दूध की गुणवत्ता सही होने पर उसे कांच की बोतलों में लगभग 30 मिलीलीटर की यूनिट बनाकर 0.20 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान पर रख दिया जाता है। बैंक में दूध छह माह तक सुरक्षित रह सकता है। दूध उन माताओं की काउंसिलिंग कर लिया जाएगा, जिनके बच्चों की पैदा होते ही किसी वजह से मौत हो जाती है। इसके अलावा कुछ माताओं को दूध बहुत ज्यादा होता है।

एमसीएच विंग में आईवीएफ सेंटर व कंगारू केयर

प्रो. जैन ने बताया कि नि: संतान दंपतियों के इलाज के लिए यहां एम्स की तरह आईवीएफ सेंटर भी बन रहा है। इस प्रस्ताव को केंद्र सरकार से अनुमति मिल गई है। बांझपन की समस्या को देखते हुए इसके लिए अलग प्रस्ताव बनाया गया था। विंग की एक मंजिल पर आईवीएफ सेंटर स्थापित होगा। गरीब दंपतियों को यहां सरकारी दर पर इलाज मिलेगा। यहां कंगारू केयर यूनिट भी बन रहा है। इसमें उन बच्चों को रखा जाएगा जिनका जन्म के समय कम वजन होता है।