INSIDE STORY: सपा में 'महाभारत', जानिए वो मौके जब चाचा-भतीजा आ गए थे आमने-सामने...

नई दिल्ली (15 सितंबर):

झगड़े की शुरूआत हुई था 2011 में... - 2012 यूपी विधानसभा चुनाव से पहले सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने पार्टी की जिम्मेदारी अखिलेश यादव को दी। - अखिलेश यादव को चाचा शिवपाल की जगह पार्टी का अध्यक्ष बना दिया गया। - अखिलेश के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी ने 403 में से 224 सीटें जीतकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। - अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बने और चाचा शिवपाल यादव भतीजे की सरकार में सिर्फ मंत्री बने।

डीपी यादव को पार्टी में शामिल करने को लेकर हुई तकरार... - वैसे चाचा-भतीजे के बीच जंग की शुरूआत नई नहीं है, शुरूआत तो 2012 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले ही हो गई थी। - जब अखिलेश यादव ने पश्चिमी यूपी के बड़े माफिया डीपी यादव को सपा में शामिल करने का खुले तौर पर विरोध किया था।  - अखिलेश के विरोध की वजह से डीपी यादव की सपा में एंट्री नहीं हो सकी थी, चाचा शिवपाल चाहते थे कि डीपी यादव की पार्टी में एंट्री हो।

बिहार चुनाव- महागठबंधन पर असमंजस... - 2015 बिहार विधानसभा चुनाव के समय महागठबंधन को लेकर चाचा-भतीजा में मतभेद थे। - शिवपाल पार्टी को महागठबंधन में शामिल करने के पक्ष में थे - जबकि अखिलेश और रामगोपाल यादव शिवपाल की बात से सहमत नहीं थे।  - बाद में सीटों के बंटवारे को लेकर पार्टी ने महागठबंधन से खुद को अलग कर लिय था।

नवंबर 2015 में पंचायत अध्यक्ष चुनावों को लेकर हुए आमने-सामने... - पिछले साल नवंबर में जब पंचायत अध्यक्षों के चुनाव में पार्टी के अंदर टिकट बंटवारे को लेकर भी दोनों आमने-सामने आ गए थे। - तब शिवपाल यादव ने टिकट बंटवारे को लेकर अखिलेश के करीबी सुनील यादव और आनंद भदौरिया को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया था।  - इसके विरोध में अखिलेश यादव ने सैफई महोत्सव का बहिष्कार कर दिया, मजबूरन दोनों युवा नेताओं को पार्टी में फिर से वापस लेना पड़ा था।

बेनी प्रसाद वर्मा और अमर सिंह को लेकर भी हुआ झगड़ा... - इसके बाद मई में बेनी प्रसाद वर्मा को पार्टी में शामिल करने पर अखिलेश असहमत थे, इसमें भी शिवपाल की मुख्य भूमिका थी। - अमर सिंह को भी पार्टी में दोबारा वापस लाने को लेकर आजम और रामगोपाल के खुला विरोध कर रहे थे। - इसके चलते अखिलेश असमंजस में थे, लेकिन शिवपाल पूरी तरह से अमर सिंह के साथ खड़े थे।

फिल्म विकास परिषद के अध्यक्ष पद को लेकर मतभेद... - फिल्म विकास परिषद के मामले में भी चाचा-भतीजे के बीच में मतभेद देखने को मिले थे।  - सुत्रों के मुताबिक शिवपा जया प्रदा को फिल्म विकास परिषद का अध्यक्ष बनाए जाने पर सहमत थे। - पर अखिलेश ने गोपाल दास नीरज को फिल्म विकास परिषद का अध्यक्ष बना दिया।  - इसके बाद अमर सिंह काफी आग बबूला भी हुए।  - बाद में दबाव में आकर अखिलेश ने जया प्रदा को फिल्म विकास परिषद का उपाध्यक्ष बना दिया।

मथुरा का जवाहर कांड... - मथुरा में हुए जवाहर कांड में भी शिवपाल और अखिलेश यादव के बीच अनबन दिखाई दी थी।  - खबरों के मुताबिक शिवपाल कई बार रामवृक्ष से मुलाकात कर चुके हैं, जबकि अखिलेश उससे खुश नहीं थे। - जवाहर बाग पर जबरन कब्जा को लेकर सशस्त्र संघर्ष में 2 पुलिस अधिकारी समेत 22 उपद्रवी मारे गए थे। 

अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी की पार्टियों के विलय को लेकर आमने-सामने... - अतीक अहमद के पार्टी में शामिल होने पर अखिलेश ने कड़ी आपत्ति जताई थी, शिवपाल ने अतीक का साथ दिया था।  - शिवपाल यादव को एक और बड़ा झटका तब लगा जब उनकी पहल पर मुख्तार अंसारी की पार्टी का विलय सपा में होने से रोक दिया गया। - 21 जून को कौमी एकता दल का सपा में विलय हो गया लेकिन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के विरोध के कारण 25 जून को ही विलय रद्द कर दिया गया। - कौमी एकता दल के विलय को लेकर और मुख्तार अंसारी की एंट्री से अखिलेश नाराज थे, विलय कराने के लिए शिवपाल पूरी कोशिश कर रहे थे।  - मध्यस्थता करने वाले मंत्री से नाराजगी जाहिर करते हुये अखिलेश ने मंत्रि‍मंडल से बलराम यादव को निष्कासित किया था।  - विलय रद्द होने के बाद मंत्रिमंडल विस्तार में शिवपाल के कहने पर दोबारा बलराम यादव को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया।

शिवपाल ने सार्वजनिक मंचों से दी इस्तीफे की धमकी... - इसके कुछ दिन बाद नाराज शिवपाल ने सार्वजनिक मंचों से एक से ज्यादा बार इस्तीफे देने की धमकी दी थी।  - शिवपाल यादव ने 14 अगस्त को मैनपुरी में एक कार्यक्रम के दौरान बेहद भावुक अंदाज में कहा कि अधिकारी उनकी बात नहीं सुन रहे हैं। - इसके बाद सपा प्रमुख मुलायम सिंह को बीच में आना पड़ा था, उन्होंने सार्वजनिक रूप से अखिलेश को फटकार लगाई। - मुलायम ने कहा था कि शिवपाल पहले भी इस्तीफा दे चुके हैं और उन्होंने बमुश्किल उन्हें मनाया था। - उन्होंने कहा था कि अगर शिवपाल पार्टी से चले गए तो सरकार और पार्टी के लिए मुश्किल हो जाएगी।

मुख्य सचिव को लेकर दोनों में टकराव... - अखिलेश के चहेते मुख्य सचिव आलोक रंजन के रिटायरमेंट के बाद दीपक सिंघल को मुख्य सचिव बनाए जाने में शिवपाल का हाथ था। - दीपक सिंघल पिछले चार सालों से शिवपाल के सिंचाई विभाग में प्रमुख सचिव के पद पर कार्यरत थे। - अखिलेश इसके पक्ष में नहीं थे, वो सिंघल की जगह प्रवीर कुमार को मुख्य सचिव बनाना चाहते थे।

शिवपाल के करीबी मंत्रियों को अखिलेश ने किया बर्खास्त... - 12 सितम्बर को अखिलेश ने भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे अपने दो कैबिनेट मंत्रियों को बर्खास्त कर दिया। - दोनों कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति और राजकिशोर सिंह शिवपाल के करीबी माने जाते हैं।