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भूखमरी की कगार पर पहुंचे परिवार को बचाने के लिए लड़कियां बनीं लड़का

बेटा और बेटी में कोई फर्क नहीं होता। आज के समय में ऐसा कोई काम नहीं है जो लड़कियां नहीं कर सकती है। आज लड़कियां अपने परिवार की सहारा बन रही हैं। ऐसी बेटियों पर न सिर्फ उनके परिजनों के नाज है बल्कि समाज भी उनपर फक्र करने पर मजबूर है

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (22 जनवरी): बेटा और बेटी में कोई फर्क नहीं होता। आज के समय में ऐसा कोई काम नहीं है जो लड़कियां नहीं कर सकती है। आज लड़कियां अपने परिवार की सहारा बन रही हैं। ऐसी बेटियों पर न सिर्फ उनके परिजनों के नाज है बल्कि समाज भी उनपर फक्र करने पर मजबूर है। ऐसा ही कुछ कहानी है उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले की दो बहनों की। पिता को लकवा मारने के बाद ज्योति और नेहा का परिवार दो वक्त की रोटी के लिए मुहाताज हो गया, ऊपर से पिता की दवाई खर्च। दोनों मासूम को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि कैसे उनका परिवार इस संकट से उबरेगा।

ज्योति और नेहा के पिता पेशे से नाई थे और उनका एक सैलून था। लेकिन लकबा ग्रस्त होने के बाद वो फिर अपना दुकान नहीं खेल पा रहे थे। ऐसे में बेटियों ने अपने पिता की दुकान फिर से खोलने की ठानी। पिता को उनके सैलून पर ले गई। दुकान खेला, उसकी सफाई की। शीशे पर पड़ी धूल की परतों को साफ कर दोनों ने सैलून में बाल और दाढ़ी बनाना शुरू कर दिया। लड़की होने के कारण उन्हें इसमें दिक्कत हो रही थी, लिहाजा दोनों ने अपना नाम बदलकर दीपक और राजू कर लिया। लोगों से और आपस में दोनों बहने पुरूषों की तरह बात करने लगी। इस तरह दोनों दिनभर में बाल काटकर और दाढ़ी काटकर 400 से 500 रुपये तक कमाने लगी। इस बीच दोनों ने अपनी पढ़ाई भी जारी रखा। ज्योति ने 12वीं और नेहा ने 10वीं तक की पढ़ाई की। हालांकि बाद में उन्हें अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी।  

ज्योति और नेहा की हिम्मत का सबूत बन चुका यह सैलून अब सिर्फ गोरखपुर में ही नहीं बल्की पूरे अब तो पूरे देश में मशहूर हो गया है। हालांकी पहले ये दोनों बहने ब्यूटीपार्लर खोलना चाहती थी मगर बाद में उन्होंने अपने इस फैसले को बदलकर जेंट्स सलून खोलने का फैसला किया। समाज की परवाह किए बिना पिता-परिवार पर आई मुश्किलों से निपटने के लिए आज भी सैलून चला रही हैं। लेकिन उम्र बढ़ने का बाद अब लोगों को दोनों बेटियों की हिम्मत के बारे में पता चल गया।

जब ये बात आस पास के इलाकों में फैली तो कुशीनगर के विधायक रजनीकांत मणि त्रिपाठी व ज्वाइंट मजिस्ट्रेट अभिषेक पांडेय बनवारी टोला गांव स्थित उनके घर पहुंचे और दोनों बहनों को सम्मानित किया। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट अभिषेक पांडेय की तरफ से कहा गया कि बेटियों का प्रयास नारी सशक्तीकरण का नायाब उदाहरण है। उन्होंने कहा की ठेठ गंवई परिवेश में रहने वाली इन बेटियों ने समाज की परवाह किए बिना पिता- परिवार पर आई मुश्किलों को अपने कंधे पर ओढ़ लिया इस वजह से दोनों सम्मान की हकदार हैं। वहीं उन्होंने ये भी बताया की जल्द ही इन्हें आर्थिक तौर पर कुढ मदद या सम्मान की राशी के तौर पर दए जाने की सिफारिश शीघ्र ही शासन को पत्र भेजकर की जाएगी।

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