दहलने से बचा हिन्दुस्तान, 24 घंटे में ISI के तीन एजेंट गिरफ्तार

दीपक दुबे, मुंबई (4 मई): ISI हिंदुस्तान में 26/11 से भी बड़ी आतंकी साजिश को अंजाम देने की फिराक में था, लेकिन समय रहते ISI के एजेंट्स को महाराष्ट्र ATS और उप्र ATS के ज्वाइंट ऑपरेशन में गिरफ्तार कर लिया। ये सभी पकिस्तान को आर्मी कैंटोनमेंट से लेकर देश की प्रमुख संस्थानों और शहरों की जानकारी दे रहे थे। इसके लिए इन्हें करोड़ों की फंडिंग तक पाकिस्तान द्वारा की जा रही थी।


आफ़ताब अली को उत्तर प्रदेश ATS ने फ़ैजाबाद से गिरफ्तार किया जो आर्मी कैंटोनमेंट की जानकारियां ISI को साझा करता है। इसकी पूछताछ के बाद उप्र ATS और महाराष्ट्र ATS ने कल अल्ताफ कुरैशी नाम के ISI  एजेंट और हवाला कारोबारी को साऊथ मुंबई के पायधुनी इलाके से गिरफ्तार किया। यह वो शख्स है जो हवाला के जरिए बड़ी मात्रा में तमाम एजेंट को फंडिंग करता था। वहीं इससे कड़ी पूछताछ में इसने जावेद नाविवाला नाम के ISI एजेंट को गिरफ्तार किया। यह गिरफ्तारी भी मुंबई से हुई। जावेद ISI के निर्देशों का पालन करता फंड इकट्ठा करता और किस एजेंट को कितना पैसा भिजवाना है यह सारे निर्णय यह लेता।


आफताब अली

आफताब अली वो शख्स है जो पकिस्तान जाकर ISI की निगरानी में जासूसी की ट्रेनिंग तक कर चूका है, जिसके बाद इसने आर्मी की जानकारी फोटो साझा करनी शुरू की। इसके पास से कई मह्त्य्वपूर्ण कागजात आर्मी से जुड़े, आर्मी कैंट इलाके का नक्शा, आतंकी लिटरेचर की कई किताबें, फोटोग्राफ, मोबाइल फोन जिससे जानकारी व फोटो भेजी गई, साडी जब्त की गई। इसी की निशानदेही पर दो बड़ी गिरफ्तारियां मुंबई से हुई।


अल्ताफ कुरैशी

आफताब मुंबई में रहने वाले अल्ताफ कुरैशी के संपर्क में था। अल्ताफ गुजरात का रहने वाला था और ISI के लिए मुंबई से हवाला के जरिए ISI के स्लीपर सेल को पैसे मुहैया करवाता। अल्ताफ के पास से 70 लाख रूपये भी बरामद किए गए जो बड़े आतंकी घटना को अंजाम देने के लिए इस्तेमाल किया जाना था। इसने ही फैजाबाद में पकडे़ गए आफताब के बैंक अकाउंट में पैसे जमा करवाए थे। महाराष्ट्र ATS और उप्र ATS ने जब कल इसे गिरफ्तार किया तो इसने एक ISI एजेंट्स जावेद नाविवाला का नाम बताया।


जावेद नाविवाला

जावेद को ISI से निर्देश दिए जाता था की वो अल्ताफ सहित किस-किस को फंडिंग करवानी है। महाराष्ट्र ATS और उप्र ATS साथ मिलकर आरोपियों से पूछताछ कर रही है। जहां कई और एजेंटों के नाम सामने आएंगे। आखिर कितने बड़े पैमाने पर ISI ने अपना नेटवर्क बिछाया है।