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गठबंधन के बाद धमाकेदार प्रचार की तैयारी में एसपी-बीएसपी

कांग्रेस को झटका देकर गठबंधन करने वाले अखिलेश यादव और मायावती अब धमाकेदार तरीके से चुनाव प्रचार की तैयारी में जुटे हैं। जानकारी के मुताबिक बीएसपी प्रमुख मायावती और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश में 18 साझा रैलियां करेंगे

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (13 जनवरी): कांग्रेस को झटका देकर गठबंधन करने वाले अखिलेश यादव और मायावती अब धमाकेदार तरीके से चुनाव प्रचार की तैयारी में जुटे हैं। जानकारी के मुताबिक बीएसपी प्रमुख मायावती और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश में 18 साझा रैलियां करेंगे। ये रैलियां सभी मंडलों में आयोजित की जाएंगी। माना जा रहा है कि मायावती के जन्मदिन यानी 15 जनवरी से चुनाव अभियान की शुरुआत होगी। मायावती 15 को लखनऊ में अपना जन्मदिन मनाने के बाद दोपहर बाद दिल्ली चली जाएंगी। दिल्ली में कई पार्टियों के नेता उनसे मिलेंगे। उसी दिन रैलियों का ऐलान किया जाएगा। अपने जन्मदिन पर ही मायावती कुछ और बड़े ऐलान भी कर सकती हैं।

बताया जा रहा है कि मायावती और अखिलेश यादव चुनाव अभियान और साझा रैली की शुरुआत की शुरुआत लखनऊ से करेंगे और उसके बाद गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज समेत अन्य जगहों पर रैली करेंगे। जानकारी के मुताबिक अगले एक सप्ताह में दोनों नेता तय कर लेंगे कि कौन, किस सीट पर चुनाव लड़ेगा। साथ ही दोनों दल साझा चुनाव अभियान की भी रूपरेखा जल्द तय कर लेंगे। गठबंधन की रूपरेखा से जुड़े एसपी के सूत्रों ने शनिवार को बताया कि दोनों दलों के बीच बंटवारे वाली सीटों पर आपसी सहमति लगभग बन गई है।

गठबंधन में राष्ट्रीय लोकदल की सीटों को लेकर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं होने के बारे में एसपी के एक नेता ने बताया कि कांग्रेस के लिए छोड़ी गई दो सीटों के अलावा आरएलडी के लिए फिलहाल दो सीट छोड़ गई है लेकिन यह अंतिम आंकड़ा नहीं है। आरएलडी नेताओं के साथ बातचीत और जमीनी वास्तविकता को ध्यान में रखते हुए एसपी-बीएसपी अपने कोटे की अधिकतम एक या दो सीट छोड़ने पर विचार कर सकते हैं। आपको बात दें कि लखनऊ में शनिवार को अखिलेश और मायावती ने संयुक्त संवाददाता सम्मेलन कर एसपी-बीएसपी गठबंधन की औपचारिक घोषणा की। इस दौरान मायावती ने गठबंधन से कांग्रेस को अलग रखने की जानकारी देते हुए इस बात का स्पष्ट संकेत दिया कि यह फैसला सोची समझी रणनीति के तहत बीजेपी के पक्ष में कांग्रेस के मतों का ध्रुवीकरण रोकने के लिए किया गया है।

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