US ने फिर दिखाई ताकत, एक हफ्ते में दूसरी बार टेस्ट की एटमी मिसाइल

नई दिल्ली(27 फरवरी) अमेरिका ने  ने एक हफ्ते में ही दूसरी बार अपनी एटमी मिसाइल इंटरकॉन्टिनेंटल न्यूक्लियर बैलिस्टिक का टेस्ट किया है। माना जा रहा है अमेरिका ने ऐसा रूस, चीन और नॉर्थ कोरिया के साथ बढ़ते तनाव के बीच अपनी ताकत दिखाने के मकसद से किया।

अमेरीका के डिप्युटी डिफेंस मिनिस्टर रॉबर्ट वॉर्क ने कहा कि यह टेस्ट तीनों देशों को अमेरीका की ताकत के बारे में साफ मैसेज पहुंचाने के लिए किया गया है।

10 हजार किमी है मारक क्षमता एक न्यूज एजेंसी के अनुसार अमेरीका ने मिनटमैन-III मिसाइल का शुक्रवार रात कैलिफोर्निया में टेस्ट किया। यह मिसाइल 24 हजार किमी/घंटा की रफ्तार से आसमान में गई। दागे जाने के आधे घंटे बाद मिसाइल ने साउथ पेसिफिक के मार्शल आयलैंड में 6500 किमी की दूरी पर अपने टारगेट को हिट किया। इस मिसाइल की रेंज 10 हजार किमी है। यानी रूस, चीन और कोरिया को अमेरीका आसानी से निशाना बना सकता है।  

न्यूक्लियर वेपन इस्तेमाल कर सकता है अमेरीका इस टेस्ट के बाद वॉर्क ने कहा कि अमेरीका जनवरी 2011 के बाद से इस मिसाल के 15 टेस्ट कर चुकी है। वॉर्क ने कहा कि हम रूस, चीन और नॉर्थ कोरिया को अपनी ताकत दिखाने के लिए ये टेस्ट करते हैं। यह इस बात का सिग्नल है कि हमारा देश जरूरत पडऩे पर न्यूक्लियर वेपन का इस्तेमाल करने को तैयार है।  

चीन के साथ है यह विवाद अमेरीका का चीन के साथ साउथ चाइना सी को लेकर विवाद चल रहा है। चीन साउथ चाइना सी में 12 मील के इलाके पर अपना हक जताता है। वहीं चीन के अलावा ताइवान, फिलीपींस, वियतनाम और मलेशिया भी इस इलाके पर अपना दावा जताते हैं। यहां असली लड़ाई तेल और नेचुरल गैस की है। अमेरीका के मुताबिक इस इलाके में 213 अरब बैरल तेल और 900 ट्रिलियन क्यूबिक फीट नेचुरल गैस का भंडार है। इस समुद्री रास्ते से हर साल 7 ट्रिलियन डॉलर का व्यापार होता है। चीन ने हाल ही साउथ चाइना सी पर आठ मिसाइलें तैनात कर दी थीं जिसके बाद अमरीका और चीन के बीच तीखी बयानबाजी हुई थी।

नॉर्थ कोरिया दे रहा चुनौती

नॉर्थ कोरिया ने 7 फरवरी को लॉन्ग रेंज मिसाइल लॉन्च की थी। तानाशाह किम जोंग उन के अफसरों ने इसे अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट लॉन्च बताया था, जबकि जापान और अमेरीका ने इसे मिसाइल टेस्ट माना था। इससे पहले जनवरी में नॉर्थ कोरिया ने हाइड्रोजन बम टेस्ट कर दुनिया को चौंका दिया था। इससे पहले वर्ष 2006, 2009 और 2013 में न्यूक्लियर बम की टेस्टिंग कर चुका है।