अमेरिका ने टीसीएस-इन्फोसिस लगाया वीजा नियम तोड़ने का आरोप

वाशिंगटन (23 अप्रैल): अमेरिका ने भारत की अग्रणी आईटी कंपनी टीसीएस और इन्फोसिस पर H1B वीजा में दुरुपयोग का आरोप लगाया है। ट्रंप प्रशासन का आरोप है कि लॉटरी सिस्टम में ज्यादा से ज्यादा आवेदन कर ये कंपनियां H1B वीजा के कोटे में बड़ा हिस्सा हासिल कर लेती हैं।

अमेरिकी सरकार ने लॉटरी सिस्टम की जगह योग्यता आधारित आव्रजन नीति लाने का इरादा जताया है। व्हाइट हाउस के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि टीसीएस, इन्फोसिस और काग्निजेंट जैसी कंपनियां बड़ी संख्या में वीजा आवेदन देती हैं, नतीजा होता है कि लॉटरी में उन्हें ज्यादा H1B वीजा मिलते हैं। ये तीनों कंपनियां H1B वीजा पाने वाली तीन सबसे बड़ी कंपनियां हैं।

अधिकारी ने कहा कि ये कंपनियां H1B वीजाधारक को 60-65 हजार डॉलर का सालाना वेतन देती हैं। जबकि सिलिकन वैली में सॉफ्टवेयर इंजीनियर का औसतन वेतन 1 लाख 50 हजार डॉलर के करीब होता है। अक्सर ये कंपनियां इंट्री लेवल की नौकरियों के लिए भी H1B वीजा का इस्तेमाल करती हैं।