रियो ओलंपिक: अमेरिकी तैराकों से पुलिस ने की पूछताछ

नई दिल्ली (19 अगस्त): रियो ओलंपिक में अमेरिकी तैराकों से कथित चोरी मामले में ब्राजीलियाई पुलिस ने 4 घंटे तक पूछताछ की। जिसके बाद उन्हें जाने दिया गया। इन तैराकों के नाम गनर बेंट्ज और जैक कोंगेर हैं।

- अधिकारियों ने अमेरिका के अन्य तैराक रयान लोचटे से भी इस मामले में पूछताछ की जाने की बात कही है।

- रिपोर्ट के मुताबिक, बेंट्ज और कोंगर बुधवार की शाम अमेरिका जाने के लिए विमान में बैठ रहे थे। जब पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया और उनसे पूछताछ की।

- लोचटे ने चोरी की रिपोर्ट दर्ज की थी। हिरासत के दौरान बेंट्ज और कोंगेर ने बयान देने से इनकार कर दिया।

- दोनों के वकील ने अपनी जानकारी में यह बात कही। रिहा किए जाने के बाद तैराकों को हवाई अड्डे के पास एक होटल में रखा गया। स्थानीय अधिकारियों ने उनके पासपोर्ट रख लिए हैं।

- लोचटे के साथ चोरी की यह वारदात रविवार को हुई। अमेरिकी तैराक के मुताबिक, इस दौरान उनके साथ बेंट्ज, कोंगर और जिमी फीजेन भी थे।

- उन्होंने बताया कि रविवार को वे उस दौरान होटल वापस लौट रहे थे, जब पुलिस के रूप में आए चोरों ने उनकी गाड़ी को रोका और उनके साथ लूटपाट की।

क्या कहना है पुलिस का

ब्राजीलियाई पुलिस का कहना है कि चारों अमेरिकी तैराकों के अनुसार बताई गई इस घटना में कुछ अजीब बात है। वीडियो फुटेज के मुताबिक चारों तैराकों को चोरी की घटना के कुछ देर बाद ही एक-दूसरे के साथ हंसी-मजाक करते देखा गया है। ब्राजीलियाई न्यायाधीश केला ब्लांक का कहना है कि कोई भी व्यक्ति, जिसके साथ कुछ ही देर पर ऐसी घटना घटी हो वह इस तरह का व्यवहार नहीं करता।

ब्राजील की पुलिस का कहना है कि सच बाहर न आए, इसलिए अमेरिकी तैराकों ने ऐसी कहानी बनाई है। पुलिस के मुताबिक चारों तैराक नशे में थे और बाथरूम के इस्तेमाल के लिए एक गैस स्टेशन पर रुके थे। गैस स्टेशन का दरवाजा तोड़ने के कारण उनकी वहां के सुरक्षा अधिकारियों के साथ कहा सुनी हुई थी। उन्होंने पुलिस बुलाई और इससे पहले की पुलिसकर्मी वहां पहुंचते तैराकों ने निकलने की कोशिश की। जिसकी वजह से बहस और बढ़ गई।

इस मामले की वजह से ब्राजील की न्याय प्रणाली ने चारों अमेरिकी तैराकों के पासपोर्ट जब्त करने का आदेश दिया। लेकिन लोचटे पहले ही अमेरिका लौट चुके थे। ब्राजील के कानून के अनुसार, पुलिस के पास झूठी रिपोर्ट लिखवाने के आरोप में अमेरिकी तैराकों को छह माह की जेल और जुर्माना देना पड़ सकता है।