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9/11 के पीड़ित सऊदी अरब से मांग सकेंगे हर्जाना, अमेरिकी सीनेट ने पास किया बिल

नई दिल्ली (18 मई): अमेरिकी सीनेट ने 9/11 आतंकी हमलों से संबंधित उस बिल को हरी झंडी दे दी है। जिससे हमले के पीड़ितों को सऊदी अरब के खिलाफ मुकदमे करने की मंजूरी मिल जाएगी। जिससे वे वहां के अधिकारियों से नुकसान की भरपाई के लिए हर्जाने की मांग कर सकें। सीनेट के इस कदम के बाद बिल पर अंतिम निर्णय व्हाइट हाउस की तरफ से होना है। 

2001 में हुए इस आतंकी षडयंत्र में प्लेन हाईजैक करने वाले 19 में से 15 आरोपी सऊदी नागरिक थे। जिन्होंने इन्हें हाइजैक करने के बाद इन्हें उड़ाकर न्यूयॉर्क और वाशिंगटन के टारगेट्स को निशाना बनाया था। हालांकि, रियाद ने हमेशा ही हमलों में कोई भी भूमिका होने की बाद से इनकार किया है।

ब्रिटिश अखबार 'द इंडिपेंडेंट' की रिपोर्ट के मुताबिक, यूएस कमिशन जिसे हमलों के बाद स्थापित किया गया था, उसने भी यही निष्कर्ष दिया था कि सऊदी अधिकारियों की मिली भगत का कोई भी सबूत नहीं है। हालांकि, व्हाइट हाउस पर हमेशा से ही रिपोर्ट के 28 पन्नों को सार्वजनिक करने का दबाव रहा। जिसे राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर कभी भी प्रकाशित नहीं किया गया।

1976 का कानून बना रहा अड़चन

पीडि़त परिवार लगातार अदालतों के जरिए सऊदी रॉयल फैमिली के सदस्यों, सऊदी बैंको और चैरिटीज़ को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश करते रहे हैं। हालांकि, इन कोशिशों पर बड़े पैमाने पर 1976 के कानून के तहत रोक लगा दी गई। यह कानून विदेशी राष्ट्रों को अमेरिकी अदालतों में मुकदमों के लिए कुछ प्रतिरक्षा (इम्यूनिटी) देता है।

सीनेट की तरफ से पास किया गया यह बिल पुराने कानून को नाकाम कर देगा। अब इस कानून को व्हाइट हाउस ले जाया जाना है। 

बिल को लेकर सऊदी अरब में हलचल

सऊदी अरब में इस बिल को लेकर काफी नाराजगी पैदा हो गई है। सऊदी अरब की तरफ से 750 बिलियन डॉलर की अमेरिकी सिक्योरिटीज़ और दूसरी अमरिकी सम्पत्तियों को बदले में बेचने की धमकी दी जा रही है। अगर यह बिल कानून बन जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रेसीडेंट बराक ओबामा पहले कहते रहे हैं कि वह इस बिल पर वीटो लगाएंगे।

हालांकि, इस कानून के लिए सार्वजनिक तौर पर जनता में काफी समर्थन देखने को मिला रहा है। अगर बिल कानून बन जाता है, यह उस प्रभुतासम्पन्न प्रतिरक्षा (सॉवरीन इम्यूनिटी) को हटा देगा। जिसकी वजह से अमेरिकी जमीन पर आतंकी हमलों में शामिल पाए जाने देशों, सरकारों के खिलाफ मुकदमों पर रोक लगाई जाती है। यह हमले में मारे गए लोगों के पीड़ित परिवारों और उनके रिश्तेदारों को दूसरे देशों से हर्जाना मांगने की मंजूरी देगा। 

कमिशन के पूर्व सदस्य ने किया बड़ा खुलासा

पिछले सप्ताह 'द गार्डियन' में रिपोर्ट आई थी कि हमलों के जांच करने वाले कमिशन के पूर्व सदस्य का मानना है कि 'ऐसे सबूत थे, कि कुछ सऊदी अधिकारियों ने हाईजैकर्स का साथ दिया था।' 9/11 कमिशन में 2003-04 तक रहने वाले जॉन लेहमन ने कहा था, "एक भयानक परिस्थितिजनक सबूत था।" जिससे सऊदी अरब के इस्लामिक मामलों के मंत्रालय के कई एम्पलॉईज़ की ओर इशारा जाता है।

उन्होंने कहा, "हाईजैकर्स का साथ देने में कई सऊदी व्यक्तियों की भयानक तौर पर काफी भागीदारी रही। इनमें से कई लोग सऊदी सरकार में काम करते हैं।"


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