उत्तर कोरिया पर 'प्रतिबंध' होंगे और कड़े, अमेरिका में नया विधेयक पारित

नई दिल्ली (11 फरवरी): अमेरिका की सीनेट ने बुधवार को एकमत से उत्तर कोरिया पर प्रतिबंध कड़े करने के लिए विधेयक पारित किया। गौरतलब है, हाल ही में उत्तर कोरिया ने परमाणु और मिसाइल परीक्षण किया है। जिसके बाद से पूरी दुनिया में हलचल का माहौल देखा जा रहा है। इसी के चलते उसके खिलाफ प्रतिबंधों को कड़ा करने के लिए यह कदम उठाया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, विधेयक के को-स्पॉन्सर और डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेटर रॉबर्ट मेनेंडेज ने इस बारे में जानकारी दी है। मेनेंडेज ने बताया कि उत्तर कोरिया के परमाणु एवं बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण और अन्य विध्वंसक गतिविधियों की वजह से उसपर प्रतिबंधों को कड़ा करने के लिए अमेरिकी सीनेट ने इस विधेयक को पारित किया है।

विधेयक के तहत राष्ट्रपति बराक ओबामा को उत्तर कोरिया के परमाणु हथियार कार्यक्रम, हथियारों से संबंधित सामग्री, लग्ज़री सामान, मानवाधिकारों का उल्लंघन, साइबर सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली गतिविधियों और अन्य से जुड़े पाए जाने वाले किसी भी देश पर प्रतिबंध लगाना होगा। मेनेंडेज ने कहा, "कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु मुक्त बनाने के हमारे उद्देश्य को पूरा करने में मजबूत, यथार्थवादी कूटनीति को बेअसर करने की हमारी प्रतिबद्धता पर कोई संदेह नहीं है। अमेरिका के लिए यह समय अब उत्तर कोरिया की चुनौतियों को गंभीरता से लेने का है।"

गौरतलब है कि उत्तर कोरिया ने रविवार को क्वांगमयोंगसोंग-4 पृथ्वी पर्यवेक्षण उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित करने का ऐलान किया। इसके अलावा, पिछले महीने हाइड्रोजन बम का परीक्षण करने का भी दावा किया था।

दक्षिण कोरिया में अमेरिका ने तैनात की पनडुब्बी​

उत्तर कोरिया की तरफ से हाल ही में परमाणु परीक्षण व रॉकेट प्रक्षेपण करने पर अमेरिका ने अपनी एक पनडुब्बी को दक्षिण कोरिया रवाना किया है। बताया जा रहा है कि यह पनडुब्बी परमाणु क्षमता संपन्न है।

रिपोर्ट के मुताबिक, आठ वर्षों से सेवारत वर्जीनिया क्लास पनडुब्बी यूएसएस नॉर्थ कैरोलिना (एसएसएन-777) की महत्तम गति 46 किलोमीटर प्रति घंटे है और यह टोमाहॉक क्रूज मिसाइल व टॉरपीडो दागने में सक्षम है। प्रवक्ता ने कहा कि दक्षिण कोरिया की समुद्री सीमा में इस पनडुब्बी की तैनाती के साथ ही अमेरिका ने दक्षिण कोरिया की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता दिखाई है। इसे उत्तरी कोरिया के तानाशाह किम जोंग को एक चेतावनी संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।