INSIDE STORY: #Hillary और #Trump का INDIA प्रेम, भारतीय VOTERS को लेकर चला ये दांव...

डॉ. संजीव त्रिवेदी और डॉ. संदीप कोहली,

नई दिल्ली (29 अगस्त): इस बात से तो हम सब वाकिफ हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव में भारतीय मूल के अमेरिकी वोटरों की खासी अहमियत होती है और उन्हें अपनी तरफ खींचने के प्रयास 'रिपब्लिकन' और 'डेमोक्रेटिक' दोनों ही पार्टी के उम्मीदवार करते रहे हैं। लेकिन इस बार 2016 अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में भारतीय वोटर इतने महत्वपूर्ण हो गए हैं कि इस वोट बैंक को कब्जे में करने के लिए दोनों ही दलों के बड़े नेता कुछ ऐसा कर रहे हैं जैसा कि पहले के चुनाव में कभी नहीं हुआ। जानिए क्या कर रही हैं पार्टियां भारतीय-अमेरिकी वोटर्स को रिझाने के लिए...

अमेरिकी विदेश मंत्री भारत में, जाएंगे पहली बार मंदिर, मस्जिद और गुरूद्वारे...

- अमेरिका के विदेश मंत्री जॉन केरी दूसरी भारत-अमेरिका सामरिक और व्यावसायिक वार्ता के लिए नई दिल्ली आ रहे हैं।  - जॉन केरी जो वर्तमान में डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रमुख नेता हैं और हिलेरी क्लिंटन के प्रचार में जोर-शोर से लगे हैं। - विदेश मंत्रालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक अमेरिकी विदेश मंत्री केरी 29 से 31 अगस्त तक भारत की यात्रा पर होंगे।  - विदेश मंत्री के तौर पर केरी की यह चौथी भारत यात्रा है, यहां वह कई कार्यक्रमों में शिरक्त करेंगे। - 30 अगस्त को दूसरी अमेरिका-भारत सामरिक और व्यावसायिक वार्ता की सह-अध्यक्षता करेंगे।  - लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जॉन केरी पहली बार मंदिर, मस्जिद और गुरूद्वारे जायंगे।  - भारत पहुंचने के दूसरे दिन केरी सबसे पहले दिल्ली के भीड़-भाड़ वाले इलाके चांदनी चौक जाएंगे। - वहां गुरुद्वारा शीशगंज में उनका मत्था ठेकने का कार्यक्रम है। - उसके बाद केरी उसी इलाके में स्थित गौरीशंकर मंदिर जाएंगे।  - और फिर पास में ही ऐतिहासिक जामा मस्जिद जाएंगे। - इन धर्मस्थलों के दर्शन के बाद ही केरी भारत में अपनी कूटनीतिक मुलाकातें करेंगे। - अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी का यह कार्यकम सिर्फ यूं ही नहीं बना है। - उनका यह कार्यक्रम 2016 अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है। - अमेरिका में भारतीय मूल के 30 लाख लोग रहते हैं, जिसमें से लगभग 20 लाख वोटर हैं। - अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों में 22 लाख हिंदू, 8 लाख सिख, मुस्लिम और दूसरे धर्म के वोटर्स हैं। - इसी को देखते हुए जॉन केरी का भारत में धर्मस्थलों के दौरे का कार्यक्रम विधिवत तैयार किया गया है। - जानकार कहते हैं कि ये सारा प्रयास अमेरिका में भारतीय मूल के वोटरों को रिझाए रखने की कोशिशों का हिस्सा है।

डोनाल्ड ट्रम्प भी लगे भारतीय मूल के वोटर्स को रिझाने में...

- जहां एक ओर अमेरिकी विदेश मंत्री भारतीय मूल के वोटरर्स को रिझाने में लगे हैं। - तो दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति पद के रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रम्प भी पीछे नहीं हैं। - ट्रंप इसी महीने की 24 तारीख को हिंदू संस्था के कार्यक्रम में हिस्सा लेने जा रहे हैं। - अमेरिका में हिंदू संस्था रिपब्लिकन हिंदू कोएलिशन(RHC)के कार्यक्रम में शिरकत करने वाले हैं ट्रंप। - अमेरिकन-इंडियन बिजनेसमैन शलभ कुमार ने डोनाल्ड ट्रम्प का खुलकर सपोर्ट किया है।  - शलभ ने ट्रंप के समर्थन में उनकी पार्टी को 7 करोड़ का डोनेशन भी दिया है। - शलभ कुमार ने ही 2015 में रिपब्लिकन हिंदू कोएलिशन(RHC)नाम की संस्था बनाई है। - शलभ कुमार ने कहते हैं कि 21वीं सेंचुरी को ट्रंप इंडिया-यूएस सेन्चुरी बनाना चाहते हैं। - एक इंटरव्यू में शलभ ने कहा- ट्रम्प को गलत समझा जा रहा है, वे एंटी-इंडिया नहीं हैं।  - शलभ कुमार भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिका में प्रभावशाली समर्थकों में से एक हैं। - रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनल्ड ट्रंप भी भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ कर चुके हैं।  - जब मोदी भारत के प्रधानमंत्री बने थे तो ट्रंप ने कहा था कि सालों की सुस्ती के बाद निवेशक अब भारत लौट रहे हैं। - ट्रंप ने कहा था, 'मोदी से मेरी मुलाकात नहीं हुई है लेकिन वह प्रधानमंत्री के रूप में शानदार काम कर रहे हैं। - मोदी लोगों को साथ ला रहे हैं, अब भारत के बारे में अब धारणा बदल रही है और आशावाद लौट रहा है। - ट्रंप ने कहा था कि भारत और चीन की एक जैसी शुरुआत हुई, इंडिया अच्छी तरक्की कर रहा है।  - हाल ही में ट्रंप ने एक चुनावी सभा में भारतीयों का मजाक उड़ाते हुए उनकी अंग्रेजी की नकल उतारी थी। - लेकिन तुरंत ही सफाई देते हुए भारत को एक महान देश बताते हुए कहा था कि वह भारतीय नेताओं से नाराज नहीं है। - डोनाल्ड ट्रम्प की जीत के लिए हिन्दू सेना के कार्यकर्ता दिल्ली के जंतर-मतंर पर हवन-पूजन भी कर चुके हैं।

अमेरिका में भारतीय मूल के वोटर्स...

- अमरीका के राष्ट्रपति चुनाव में मुख्यतौर पर दो पार्टियां चुनावी मैदान में रहती हैं- डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन पार्टी। - अमरीका में बसे भारतीय-अमरीकी समुदाय ने पारंपरिक तौर पर डेमोक्रेटिक पार्टी को ही समर्थन माना जाता रहा है। - भारतीयों का झुकाव डेमोक्रेट उम्मीदवार की और रहने का कारण है प्रवासियों, मध्यम वर्ग और छात्रोंके प्रति उनकी नीतियां। - Pew Research Centre के आंकड़ों के मुताबिक साल 2012 में 80 फीसदी प्रवासी भारतीयों ने डेमोक्रेट को अपना वोट दिया था  - भारतीय-अमरीकी लोगों की संख्या 30 लाख है, केवल 16 फीसदी ही रिपब्लिकन उम्मीदवारों का पक्ष में रहे हैं। - रिपब्लिकन पार्टी के कई सिनेटर भारतीय अमरीकियों पर नस्लभेदी टिप्पणी करते रहे हैं, जिससे भारतीय समाज नाराज है। - भारतीय ही नहीं एशियाई मूल के ज्यादातर अमरीकी लोग डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रति सबसे ज्यादा झुकाव दिखाते रहे हैं।

इस चुनाव में 'रिपब्लिकन' का झुकाव भी भारत की ओर... - अमेरिका और भारत के साझा इतिहास में यह पहली बार हो रहा है कि 'रिपब्लिकन' और 'डेमोक्रेटिक' पार्टी के उम्मीदवार भारत के प्रति झुकाव रखने वाले हैं। - डेमोक्रेट हिलेरी क्लिंटन भारत से भावनात्मक तौर पर जुड़ी हुई हैं तो रिपब्लिकन ट्रंप राजनीतिक-रणनीतिक तौर पर भारत के समर्थक हैं। - ओबामा से पहले राष्ट्रपति रहे जार्ज बुश ने तेजी से बदलती दुनिया को समझा और चीन की कीमत पर भारत से संबंध बढ़ाए। - जिसे 2014 के बाद मोदी और ओबामा ने भी जारी रखा... अब बारी ट्रंप और हिलेरी की है मोदी सरकार के साथ दोस्ती बनाए रखने की। - साल 2014 में किए गए सर्वेक्षण के मुताबिक अभी भी 65 फीसदी भारतीय डेमोक्रेटिक पार्टी के पाले में हैं।

इस चुनाव से भारतीयों को क्या उम्मीद है... - आज भारतीय-अमरीकी मूल के 70 फीसदी लोगों के पास कॉलेज डिग्री है और दो तिहाई के पास मैनेजमैंट नौकरियां हैं। - इनकी मीडियन आमदनी 88 हजार डॉलर है जो अमरीका में सबसे ज्यादा है। - अमरीका में रहने वाले जो भारतीय भारत में पले बढ़े हैं, वो चाहते हैं कि अमरीका सरकार अच्छा काम करे। - ज्यादातर भारतीय-अमरीकी लोग मध्यम वर्ग से हैं और उन्हें लगता है कि डेमोक्रेटिक ही उन मुद्दों को सुलझाएंगे जो उनके दिल के करीब हैं। - आउटसोर्सिंग पर अंकुश, कॉलेज शिक्षा की बढ़ती कीमत और सोशल सेक्यूरिटी को बचाए रखना जैसे कई मुद्दे हैं। - भारतीय-अमरीकी लोगों को सोशल सेक्यूरिटी का प्रावधान पसंद है क्योंकि कई लोगों के बूढ़े माता-पिता रिटायरमेंट के बाद उनके पास अमरीका आ जाते हैं।