अमेरिका-भारत ने बनाया खास प्लान, चीन को देंगे ऐसे जवाब

नई दिल्ली (24 मई ): अमेरिकी और भारत ने चीन की अहम परियोजना वन बेल्ट वन रोड (OBOR) के बाद मुंहतोड़ जवाब देने की तैयारी कर ली है। भारत ने OBOR में सहभागिता न दिखाकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। अब अमेरिका भी इस मामले में अपनी नई भूमिका के लिए कमर कस चुका है। अमेरिका चीन के OBOR को काउंटर करने के लिए साउथ और साउथ ईस्ट एशिया की दो महत्वपूर्ण आधारभूत परियोजनाओं को फिर से शुरू कर रहा है। इनमें भारत एक महत्वपूर्ण साझेदार है।

डोनल्ड ट्रंप प्रशासन 'न्यू सिल्क रोड' पहल फिर से शुरू करने जा रहा है। इस परियोजना की घोषणा जुलाई 2011 में अमेरिका की तत्कालीन विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने चेन्नै में एक भाषण के दौरान की थी। इस परियोजना के अलावा दक्षिण और दक्षिणपूर्वी एशिया को जोड़ने वाला इंडो-पसिफिक इकनॉमिक कॉरिडोर भी फिर से शुरू किया जाएगा।

मंगलवार को घोषित अमेरिकी प्रशासन के पहले सालाना बजट में इन दो परियोजनाओं की संक्षिप्त रूपरेखा पेश की गई। इससे पता चलता है कि 'न्यू सिल्क रूट' निजी-सार्वजनिक साझेदारी की परियोजना होगी जिसमें भारत एक अहम साझेदार होगा। विदेश विभाग ने कहा कि दक्षिण और मध्य एशिया के लिए विदेश विभाग का बजट संबंधी अनुरोध इन दो पहलों में मदद देगा।

ये परियोजनाएं हैं न्यू सिल्क रोड (NSR) जो अफगानिस्तान और उसके पड़ोसियों से संबंधित है जबकि दूसरी पहल भारत-प्रशांत आर्थिक गलियारा है जो दक्षिण एशिया और दक्षिणपूर्वी एशिया को जोड़ने के लिए है। इसमें कहा गया, 'एनएसआर का महत्व बढ़ गया है क्योंकि अफगानिस्तान में परिवर्तन का दौर चल रहा है और अमेरिका 'अफगानी लोगों को सफल होने और अपने पैरों पर खड़े होने में' मदद देना चाहता है।'

न्यू सिल्क रोड के बारे में अमेरिकी विजन की घोषणा करते हुए क्लिंटन ने तब चेन्नै में कहा था, 'तुर्कमन गैस क्षेत्र भारत और पाकिस्तान दोनों की बढ़ती ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करने में मदद कर सकता है। इसके अलावा अफगानिस्तान और पाकिस्तान को अच्छी मात्रा में ट्रांजिट रेवेन्यू भी मिलेगा। तजाक कॉटन से भारत का लिनेन बन सकता है। अफगानिस्तान के फर्निचर और फलों को आस्तना (काजक्सतान की राजधानी) या मुंबई या कहीं और का बाजार मिल सकता है।'

OBOR की मदद से चीन ने खुद को एशिया और प्रशांत महासागर क्षेत्र के देशों के जरिए यूरोप और अफ्रीका से जोड़ने का लक्ष्य बनाया है। भारत OBOR के तहत आने वाले एक प्रॉजेक्ट का विरोध कर रहा है जो पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में गिलगित-बाल्टिस्तान से होकर गुजरने वाला है।