#USPresidentialElection की पहली बड़ी बहस, #Hillary #Trump के बीच होगी #LIVE टक्कर, जानिए कौन किससे आगे...

डॉ. संदीप कोहली,

नई दिल्ली (26 सितंबर): 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के लिए होने वाली पहली टीवी डिबेट अमेरिकी समयानुसार शाम 9 बजे होने जा रही है। भारत में उस समय मंगलवार सुबह के 6.30 बज रहें होंगे। यह बहस अमेरिकी राष्ट्रपति के दावेदार डोनाल्ड ट्रंप और हिलेरी क्लिंटन के बीच होगी। दोनों उम्मीदवार अमेरिका की दिशा, समृद्धि और सुरक्षा जैसे विषयों पर अपना-अपना पक्ष रखेंगे। बहस न्यूयॉर्क के हेम्पस्टीड स्थित होफस्ट्रा विश्वविद्यालय में आयोजित होगी जो 90 मिनट चलेगी और इसका दुनियाभर में सीधा प्रसारण किया जाएगा। गौरतलब है कि अमेरिका में टीवी पर राष्ट्रपति उम्मीदवारों के बीच बहस होने की एक बेहद महत्वपूर्ण परंपरा है। औपचारिक रूप से 1960 में पहली बार रिचर्ड निक्सन और जॉन एफ कैनेडी के बीच टीवी पर बहस हुई थी। मतदाताओं का मूड अपने पक्ष में करने के लिए यह बहस काफी अहम मानी जाती है। 

तीन बार हिलेरी,ट्रंप होंगे आमने सामने... अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में आजकल उम्मीदवारों के बीच 3 बहस होती हैं। रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप और डेमोक्रेटिक उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन के बीच भी तीन बहस निर्धारित की गई हैं। पहली बहस 26 सितंबर को न्यूयॉर्क के हैंपस्टेड में होगी। दूसरी 9 अक्तूबर को सेंट लुइस में और तीसरी 19 अक्तूबर को लास वेगास में होगी। हर एक बहस 90 मिनट की होगी। बहस का प्रारूप और मुद्दे पहले से ही निर्धारित होते हैं।

बहस का मकसद उम्मीदवारों की काबिलियत परखना... अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के लिए होने वाले मतदान से पहले इस बहस के माध्यम से उम्मीदवारों की काबिलियत परखी जाती है। बहस के बाद मतदाता तय करते उन्हें किसे राष्ट्रपति चुनना है किसे नहीं। चुनाव के आखिरी 6 हफ्तों में दोनों उम्मीदवार तीन टीवी डिबेट में शामिल होते हैं। टीवी पर होने वाली बहस की लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है की साल 1980 में होने वाली जेराल्ड फोर्ड और जिमी कार्टर के बीच बहस को 8 करोड़ लोगों ने टीवी पर देखा जब की उस समय अमेरिका की आबादी 22 करोड़ के आसपास थी।

हिलेरी और ट्रंप में कांटे की टक्कर - प्रेजिडेंशियल डिबेट से पहले अमेरिका के कई अखबारों और टीवी चैनलों ने सर्वे कराए हैं। जिसमें दोनों उम्मीदवारों के बीच कांटे की टक्कर बताई जा रही है। - द वॉशिंगटन पोस्ट और एबीसी न्यूज के पोल के अनुसार डेमोक्रेटिक पार्टी से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार हिलेरी 49% अंक लेकर ट्रंप (47%) से दो अंक आगे हैं। - सभी बड़े चुनावों पर नजर रखने वाले रियल क्लियर पॉलिटिक्स के मुताबिक, चुनावों के नवीनतम औसत में हिलेरी ट्रम्प से ढाई फीसदी अंक से आगे हैं। - दोनों उम्मीदवारों में 2 फीसदी का अंतर बहुत मायने नहीं रखता, अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में दो फीसदी वोट जीत या हार तय कर देते हैं। - एनबीसी/वॉल स्ट्रीट जर्नल के सर्वेक्षण में क्लिंटन को 43 और ट्रंप को 37 फीसदी मतदाताओं ने समर्थन किया। - इकोनॉमिस्ट के सर्वेक्षण में क्लिंटन को 48 और ट्रंप को 44 फीसदी अकों की बढ़त दी गई है। - समाचार एवं सर्वेक्षण एजेंसी रॉयटर के सर्वेक्षण के अनुसार क्लिंटन को 41 और ट्रंप को 37 फीसदी अंक मिले हैं। - अमेरिका के दो बड़े अखबारों वॉशिंगटन पोस्ट और न्यूयॉर्क टाइम्स तो सीधा ट्रंप के खिलाफ ही लिख रहे हैं। - द वॉशिंगटन पोस्ट और द न्यूयॉर्क टाइम्स के संपादकीय बोर्ड ने कहा कि ट्रंप को देश का राष्ट्रपति नहीं चुना जाना चाहिए - द वॉशिंगटन पोस्ट ने कहा, इस बात पर बहस की आवश्यकता नहीं है कि डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति बनने के लिए उपयुक्त नहीं हैं। - एनबीसी के मुताबिक ट्रंप ने 20 बड़े मुद्दों पर 117 बार अपना स्टैंड बदला है, अबॉर्शन जैसे मुद्दे पर 8 घंटे में 3 बार बयान बदला।

भारत के लिहाज से भी खास

अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव में भारतीय मूल के अमेरिकी वोटरों की खासी अहमियत होती है और उन्हें अपनी तरफ खींचने के प्रयास 'रिपब्लिकन' और 'डेमोक्रेटिक' दोनों ही पार्टी के उम्मीदवार करते रहे हैं। लेकिन इस बार 2016 अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में भारतीय वोटर इतने महत्वपूर्ण हो गए हैं कि इस वोट बैंक को कब्जे में करने के लिए दोनों ही दलों के बड़े नेता कुछ ऐसा कर रहे हैं जैसा कि पहले के चुनाव में कभी नहीं हुआ। जानिए क्या कर रही हैं पार्टियां भारतीय-अमेरिकी वोटर्स को रिझाने के लिए...

डोनाल्ड ट्रम्प भी लगे भारतीय मूल के वोटर्स को रिझाने में... - जहां एक ओर अमेरिकी विदेश मंत्री भारतीय मूल के वोटरर्स को रिझाने में लगे हैं। - तो दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति पद के रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रम्प भी पीछे नहीं हैं। - ट्रंप इसी महीने की 24 तारीख को हिंदू संस्था रिपब्लिकन हिंदू कोएलिशन(RHC)के कार्यक्रम में हिस्सा लिया। - अमेरिकन-इंडियन बिजनेसमैन शलभ कुमार ने डोनाल्ड ट्रम्प का खुलकर सपोर्ट किया है।  - शलभ ने ट्रंप के समर्थन में उनकी पार्टी को 7 करोड़ का डोनेशन भी दिया है। - रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनल्ड ट्रंप भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ कर चुके हैं।  - ट्रंप ने कहा था, 'मोदी से मेरी मुलाकात नहीं हुई है लेकिन वह प्रधानमंत्री के रूप में शानदार काम कर रहे हैं। - मोदी लोगों को साथ ला रहे हैं, अब भारत के बारे में अब धारणा बदल रही है और आशावाद लौट रहा है। - डोनाल्ड ट्रम्प की जीत के लिए हिन्दू सेना के कार्यकर्ता दिल्ली के जंतर-मतंर पर हवन-पूजन भी कर चुके हैं।

अमेरिका में भारतीय मूल के वोटर्स... - अमरीका के राष्ट्रपति चुनाव में मुख्यतौर पर दो पार्टियां चुनावी मैदान में रहती हैं- डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन पार्टी। - अमरीका में बसे भारतीय-अमरीकी समुदाय ने पारंपरिक तौर पर डेमोक्रेटिक पार्टी को ही समर्थन माना जाता रहा है। - भारतीयों का झुकाव डेमोक्रेट उम्मीदवार की और रहने का कारण है प्रवासियों, मध्यम वर्ग और छात्रोंके प्रति उनकी नीतियां। - Pew Research Centre के आंकड़ों के मुताबिक साल 2012 में 80 फीसदी प्रवासी भारतीयों ने डेमोक्रेट को अपना वोट दिया था  - भारतीय-अमरीकी लोगों की संख्या 30 लाख है, केवल 16 फीसदी ही रिपब्लिकन उम्मीदवारों का पक्ष में रहे हैं। - रिपब्लिकन पार्टी के कई सिनेटर भारतीय अमरीकियों पर नस्लभेदी टिप्पणी करते रहे हैं, जिससे भारतीय समाज नाराज है। - भारतीय ही नहीं एशियाई मूल के ज्यादातर अमरीकी लोग डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रति सबसे ज्यादा झुकाव दिखाते रहे हैं।

इस चुनाव से भारतीयों को क्या उम्मीद है... - आज भारतीय-अमरीकी मूल के 70 फीसदी लोगों के पास कॉलेज डिग्री है और दो तिहाई के पास मैनेजमैंट नौकरियां हैं। - इनकी मीडियन आमदनी 88 हजार डॉलर है जो अमरीका में सबसे ज्यादा है। - अमरीका में रहने वाले जो भारतीय भारत में पले बढ़े हैं, वो चाहते हैं कि अमरीका सरकार अच्छा काम करे। - ज्यादातर भारतीय-अमरीकी लोग मध्यम वर्ग से हैं और उन्हें लगता है कि डेमोक्रेटिक ही उन मुद्दों को सुलझाएंगे जो उनके दिल के करीब हैं। - आउटसोर्सिंग पर अंकुश, कॉलेज शिक्षा की बढ़ती कीमत और सोशल सेक्यूरिटी को बचाए रखना जैसे कई मुद्दे हैं। - भारतीय-अमरीकी लोगों को सोशल सेक्यूरिटी का प्रावधान पसंद है क्योंकि कई लोगों के बूढ़े माता-पिता रिटायरमेंट के बाद उनके पास अमरीका आ जाते हैं।