अमेरिकी मरीन ने अफगानिस्तान में एक बार फिर संभाला मोर्चा

नई दिल्ली ( 30 अप्रैल ): अफगानिस्तान में 2014 में अमेरिकी सेना के युद्ध में सक्रिय भूमिका से हटने के बाद अमेरिकी मरीन ने एक बार फिर अफगानिस्तान के हेलमंद प्रांत में मोर्चा संभाल लिया है। 2014 के बाद अमेरिकी मरीन की यह पहली तैनाती है।


फिलहाल हेलमंद में 300 मरीन को तैनात किया गया है। ये मरीन प्रांत में नाटो के प्रशिक्षण, सहयोग और सुझाव अभियान का हिस्सा होंगे। अभी ये मरीन सीधी लड़ाई में हिस्सा नहीं लेंगे। 2001 में अमेरिका ने अफगानिस्तान में अपनी सेना भेजी थी, जिसमें मरीन भी शामिल थे। उस दौरान हेलमंद में भी हजारों की तादाद में सैनिकों ने तालिबान आतंकियों से मोर्चा लिया था। दोबारा अमेरिकी मरीन को वहां तैनात किया जाना यह दर्शाता है कि अफगानिस्तान में हालात किस तरह एक बार फिर बेकाबू हो रहे हैं और विदेशी सेनाएं तेजी से वहां लौट रही हैं।


हेलमंद प्रांत अफीम की खेती के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। अफीम की खेती से आतंकियों को पैसा मिलता है। यहां के 14 में से 10 जिलों पर तालिबान आतंकियों का कब्जा है। पिछले एक दशक में ब्रिटिश और अमेरिकी सेनाओं के लिए यह इलाका सर्वाधिक मुश्किलों भरा रहा है। अफगानिस्तान में 5,000 नाटो सहयोगियों के साथ करीब 8,400 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं।