अमेरिका में 73 साल के कैदी को मौत का इंजेक्शन, 36 साल से जॉर्जिया की जेल में था बंद

 

नई दिल्ली (3 फरवरी): दुनिया भर को मानवाधिकारों का पाठ पढाने वाले अमेरिका के जॉर्जिया में 73 साल के  कैदी ब्रैंडन जॉन्स को ज़हर का इंजेक्शन देकर मौत की नींद सुला दिया गया। 1979 में एक गैस स्टेशन पर डकैती डालने और क्लर्क की हत्या के आरोप में जॉन्स और उसके एक साथी वैन सोलोमन को दोषी ठहराया गया था। सोलोमन को 1985 में बिजली की कुर्सी पर बैठा कर इलैक्ट्रोक्यूट किया जा चुका है। प्रोजीक्यूशन कोर्ट के सामने  जॉन्स को हत्यारा साबित करने में नाकाम रहा था। इसके बावजूद उसे कोर्ट ने हत्या अभियु्क्त मानकर मौत की सजा सुनायी थी।

जॉन्स के वकीलों ने अमेरिकी के सर्वोच्च न्यायालय में इसी तथ्य को आधार बनाकर उसकी मौत की सजा को समाप्त करने की याचिका डाली थी, कोर्ट ने याचिका रद्द कर दी। अमेरिका के मानवाधिकारवादी संगठनों ने अदातल के अड़ियल रवैयै को भेदभाव पूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि जिस शख्स पर हत्या का आरोप सिद्ध ही न हुआ हो उसे सजा-ए-मौत देना नाइंसाफी है। ऐसा प्रतीत होता है कि ब्रैंडन जॉन्स 'ब्लैक' समुदाय का अमेरिकी नागरिक था, इसलिए उसके साथ कोर्ट ने बेहद सख्त और अनावश्यक व्यवहार किया। अमेरिका में 2015 में 28 लोगों को सजा-ए-मौत दी गयी। अब भी कई राज्यों की जेलों में 75 कैदी सजा-ए-मौत का इंतजार कर रहे हैं।