INSIDE STORY: बम गिरा अफगानिस्तान में लेकिन हिल गया पाकिस्तान, जानिए

डॉ. संदीप कोहली


नई दिल्ली (14 अप्रैल): अमेरिका ने आतंकियों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। कार्रवाई पाक सीमा से लगे अफगानिस्तान के हिस्से में की गई है। अमेरिका ने दुनिया का सबसे बड़ा बम GBU-43 इस्लामिक स्टेट यानि ISIS के आतंकियों पर गिराया है। 10 हजार किलो से ज्यादा भारी नॉन-न्यूक्लियर बम जिसे 'मदर ऑफ ऑल बम' भी कहा जाता है पेशावर से 100 किमी दूर अफगान सीमा पर नानगरहार प्रांत के अचिन जिले में सुरंगनुमा इमारतों पर फैंका गया है। खबरों के मुताबिक हमले में 36 आतंकी मारे गए हैं लेकिन जानकारों का कहना कि बम जितना बड़ा है मरने वालों का आंकड़ा भी उतना ही बड़ा होगा। अमेरिका के इस बड़े हमले ने पाकिस्तान की नींद उड़ा दी है। क्योंकि यह वही एरिया है जहां पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI आतंकियों को ट्रेनिंग देती है। ट्रेनिंग के बाद ये आतंकी अमेरिका और नाटो सेना को निशाना बनाते हैं।


अमेरिका में उठी मांग पाकिस्तान पर भी गिराया जाए 'महाबम'- अमेरिका के एक पूर्व वरिष्ठ राजनयिक मांग की है कि ट्रंप सरकार को पाकिस्तान में मौजूद आतंकी गुटों को निशाना बनाना चाहिए क्योंकि  पाकिस्तान में मौजूद तालिबान के ठिकाने अफगानिस्तान के लिए बड़ी समस्या हैं। बुश प्रशासन के दौरान संयुक्त राष्ट्र और अफगानिस्तान में अमेरिकी राजदूत रह चुके जालमे खलीलजाद ने अमेरिकी थिंक टैंक हडसन इन्स्टीट्यूट में चर्चा के दौरान यह मांग की। खलीलजाद ने कहा कि इन आतंकी ठिकानों में छिपे आतंकवादियों द्वारा अमेरिकी और नाटो बलों पर हमले किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा मेरा मानना है कि अफगानिस्तान की सबसे बड़ी समस्या पाकिस्तान की नीतियां हैं।


अफगान युवाओं को गुमराह कर रहा ISI

अमेरिकी सेना ने अफगान आर्मी के साथ मिलकर इस ऑपरेशन को अंजाम दिया है। जिन सुरंगों में ISIS के आतंकी छिपे हुए थे उनका इस्तेमाल अलकायदा के आतंकी करते रहे हैं। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI अलकायदा के इन आतंकियों को ट्रेनिंग देती रही है। कहा जा रहा है कि ISI के जासूस बड़ी संख्‍या में आज भी यहां मौजूद थे और इलाके में मौजूद ISIS के आतंकियों को पाकिस्‍तानी सेना का संरक्षण मिल रहा था।


पिछले कुछ समय से पाकिस्तान ने अफगान सीमा पर सैन्य ताकत बढ़ा दी है।

पाक सेना के साथ-साथ ISI पर उस क्षेत्र में युवाओं को भड़काने में लगी है।

ISI मुस्लिम धर्मगुरूओं की मदद से उन्हें धर्म के नाम लड़ने के लिए उकसा रही है।

पाक सेना और ISI का मकसद है कि तालिबान में आपस में फूट पड़ जाए।

अफगान तालिबान और पाक तालिबान एक दूसरे के खून के प्यासे हो जाएं।

साथ ही पाकिस्तान का मकसद है अफगानिस्तान में ज्यादा से ज्यादा हमले किए जाएं।

पाकिस्तान का मकसद रहा है अफगानिस्तान में भारतीय दूतावास को टारगेट करने का।

2008, 2009, 2014, 2016 में भारतीय दूतावास पर बड़े आतंकी हमले हो चुके हैं।


अफगानिस्तान में पाक विरोधी नारे- हाल के दिनों में अफगानिस्तान में पाकिस्तान के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आए हैं। जगह-जगह पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों ने मांग की राष्ट्रपति अशरफ गनी पाक के खिलाफ जंग का ऐलान करें। गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से पाक-अफगान सीमा के पास भी पाक ने मिलिट्री एक्टिविटी बढ़ा दी है। सीमा पर रह रहे अफगान लोगों पर आतंकी होने का आरोप लगाकर उनके साथ बर्बरतापूर्ण व्यवहार किया जा रहा है। नंगरहार और कुनार जैसे अफगान शहरों पर पाकिस्तान तालिबान के खात्मे के नाम पर बेगुनाहों पर मिसाइलें बरसा रहा है।

भारत-अफगानिस्तान की नजदीकियों से जलता पाकिस्तान- अफगानिस्तान की लीडरशिप का नवाज शरीफ की कठपुतली सरकार से मोहभंग हुआ है। पाक सेना के शासक और खुफिया एजेंसियां सालों-साल जिस आतंकी संगठन ‘हिज़्ब ए इस्लामी’ और उसके नेता गुलबुद्दीन हिकमतयार का इस्तेमाल करते रहे, अब वह उनके चंगुल से बाहर है। अफगानिस्तान सरकार से गुलबुद्दीन हिकमतयार का शांति समझौता, पाकिस्तान के लिए ग्वादर, क्वेटा से लेकर खैबर पख्तूनख्वा की गतिविधियों में मुश्किलें पैदा करेगा। हिज़्ब ए इस्लामी और तालिबान को यदि अफगान राष्ट्रपति गनी राजनीति की पटरी पर ले आते हैं, तो पाक-अफगान सीमा की 2430 किलोमीटर ‘डुरंड लाइन’ की तस्वीर ही बदल जाएगी।


अफगान राष्ट्रपति पाकिस्तान को सुना चुके हैं खरी खरी- अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी भारत और पीएम मोदी के मुरीद हैं। साथ ही आतंकवादियों को पनाहगाह मुहैया कराने के लिए पाकिस्तान पर बसरते रहे हैं। पिछले साल राष्ट्रपति गनी ने कहा था कि काबुल भारत के साथ अपनी दोस्ती को लेकर गौरवान्वित है, क्योंकि नई दिल्ली अफगानिस्तान के लोकतांत्रिक आकांक्षाओं में भागी है। इसके विपरीत गनी ने कहा कि पाकिस्तान आतंकवादियों को पनाह देता है और उनको प्रशिक्षित करता है, जिससे पाकिस्तान के साथ संबंध बनाना उनके देश के लिए बड़ी चुनौती है।