दुनिया का पहला परमाणु युद्धपोत सेवामुक्त, अमेरिका ने भारत को डराने के लिए किया था रवाना

नई दिल्ली ( 5 फरवरी ): अमेरिका ने शुक्रवार को दुनिया के पहले परमाणु शक्ति से लैस युद्धपोत यूएसएस इंटरप्राइज को सेवामुक्त कर दिया। इस युद्धपोत ने क्यूबा मिसाइल संकट, वियतनाम युद्ध, इराक और अफगानिस्तान युद्ध में बड़ी भूमिका निभाई। यही युद्धपोत है जिसे अमेरिका ने 1971 में भारत के खिलाफ पाकिस्तान की मदद के लिए बंगाल की खाड़ी के लिए रवाना कर दिया था।

यूएसएस इंटरप्राइज 1961 में अमेरिका के बेड़े में शामिल हुआ था। दुनिया के पहले परमाणु शक्ति वाले युद्धपोत होने के साथ-साथ सबसे लंबे समय तक सेवा देने का रिकॉर्ड भी इस युद्धपोत के नाम है। करीब 10 अमेरिकी राष्ट्रपतियों की कमांड में रहने वाले इस पोत ने पृथ्वी के 40 चक्कर लगाने के बराबर सफर तय कर लिया है।

युद्धपोत के सेवामुक्त होने के दिन इस पर काम कर चुके करीब एक लाख लोग ने यूएसएस को अलविदा कहने पहुंचे। इसके साथ ही पोत को इनऐक्टिव करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है जो करीब 4 साल तक चलेगी।

स्वर्णिम इतिहास वाले इस पोत को भारतीय किसी और वजह से ही याद रखेंगे। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने 7वीं फ्लीट को पाकिस्तान की सहायता करने के लिए बंगाल की खाड़ी भेज दिया था। भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी सोवियत रूस से मिलने वाले समर्थन के कारण पीछे नहीं हटीं। मॉस्को ने भारत की सहायता के लिए परमाणु शक्ति से लैस वॉरशिप और पनडुब्बी बंगाल की खाड़ी के लिए रवाना करने में देर नहीं लगाई थी।

सोवियत रूस और अमेरिका के बेड़ों के बंगाल की खाड़ी पहुंचने से पहले ही पाकिस्तान ने आत्मसमर्पण कर दिया था। बाद में सार्वजनिक हुई जानकारी के मुताबिक अमेरिका के राजनयिक भी प्रेजिडेंट निक्सन के इस कदम से हैरान थे।