यूएस से सबकुछ छोड़कर गोसेवा के लिए भारत आई एक महिला

नई दिल्ली (9 अगस्त): गुजरात के वडोदरा शहर की एक एनआरआई यूएस छोड़कर सिर्फ गोसेवा के लिए भारत आ गई और यहां गायों के लिए काम कर रही है। शीतल पारीख नाम की इस एनआरआई का मानना है कि गाय सबसे ज्यादा पावन और उपयोगी पशु है।

शीतल ने बताया, 'मैंने बचपन में गाय और उनके हमारी संस्कृति के लिए महत्व के बारे में पढ़ा था। मेरे पिताजी एक आयुर्वेदिक डॉक्टर हैं। उन्होंने भी मुझे गाय के महत्व के बारे में बताया था। आजकल गाय को शहरी इलाकों में उपेक्षित किया जाता है।' उन्होंने बताया कि वह बूढ़ी गायों के लिए काम करने वाले वल्लभ यूथ ऑर्गेनाइजेशन नामक संगठन से जुड़ीं। यूएस में रहकर गायों के लिए काम करना कठिन था तो मैंने शहर आकर उनकी सेवा करना चुना। हम उन किसानों से बूढ़ी गायों को खरीदते हैं जो उन्हें दूध देना बंद करने पर बेच देते हैं। हम उन्हें गोधरा स्थित गोशाला में रखते हैं।

जब तक गाय जीवित रहती हैं हम उन्हें चारा और दवाइयां खिलाते हैं। गाय को बेचने वाला एक नई गाय खरीदता है और बूढ़ी गाय के मरने तक सारा खर्च वहन करता है। आमतौर पर ऐसी गायों को बूचड़खाने ले जाया जाता है और हमारा उद्देश्य ऐसी गायों को बचाना है। हमने अभी तक 60 गायें बचाईं हैं और हमारा लक्ष्य ऐसी ही 500 गायों को बचाना है। पारीख ने पीएम मोदी के नकली गोरक्षों पर दिए गए बयान की तारीफ करते हुए कहा कि जो असली गो सेवक है उन्हें मोदी के बयान से चिंतित नहीं होना चाहिए।