फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरें बढाई, जानिए भारत पर क्या असर पड़ेगा

नई दिल्ली(16 मार्च): अमेरिकी सेंट्रल बैंक फेडरल रिजर्व ने दिसंबर 2016 के बाद फिर से ब्याज दरें बढ़ा दी है। बुधवार को फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी की है।

- अब अमेरिका में ब्याज दरें बढ़कर 0.75 से 1 फीसदी हो गई है।

- एक्सपर्ट्स का मानना है कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी का अब संकेत यह है कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था अब बेहतर हो रही है। जो, कि ग्लोबल बाजारों के लिए एक अच्छा संकेत है।

- अमेरिकी सेंट्रल बैंक फेडरल रिजर्व की चेयरमैन जेनेट येलेन ने कहा है आम लोगों को इस निर्णय को समझने में ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं है, क्योंकि हमारी अर्थव्यवस्था अच्छा परफॉर्म कर रही है। इसीलिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी का फैसला लिया गया है।

- 2008 की आर्थिक मंदी के बाद लगातार हमारी इकोनॉमी अच्छा प्रदर्शन कर रही है। अब तक 1.60 करोड़ जॉब क्रिएट हो चुकी है। हम उम्मीद करते है कि आगे भी देश की इकोनॉमी और बेहतर प्रदर्शन करेगी।

- एचडीएफसी सिक्युरिटी के हेड वी के शर्मा के मुताबिक यदि यूएस फेड की ओर से ब्याज दरों में 0.25 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी होती तोर घरेलू बाजारों के लिए चिंता की बात हो सकती थी।

- साथ ही, फेड की ओर से इस साल मौजूदा बढ़ोतरी के बाद सिर्फ 2 बार और ब्याज दरों में बढ़ोतरी के संकेत मिले हैं। लिहाजा घरेलू शेयर बाजार में तेजी जारी रहने की उम्मीद है।

- नीति बनाने वाली फेडरल ओपन मार्केट कमिटी ने मुख्य फेडरल दरों में 0 . 75 से 1 फीसदी तक बढ़ोतरी का सर्वसम्मति से निर्णय किया लेकिन इसने कहा कि अर्थव्यवस्था धीरे धीरे आगे बढ़ेगी। साथ ही साल 2017 में दरों में इसके बाद दो बार और बढ़ोतरी के संकेत भी दिए हैं।

 

- हीलियस कैपिटल के समीर अरोड़ा ने एक बिजनेस चैनल को दिए इंटरव्यु में कहा है कि अमेरिकी सेंट्रल बैंक फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों में बढ़ोतरी से घरेलू बाजारों पर कोई खास असर नहीं होगा।

- साथ ही, ब्याज दरों में बढ़ोतरी का ये भी संकेत होगा कि अमेरिका में इकोनॉमी बेहतर कर रही है, जो ग्लोबल बाजारों के लिए एक अच्छा संकेत है।

- समीर अरोड़ा का मानना है कि लंबी अवधि के लिहाज से प्राइवेट सेक्टर बैंक, एनबीएफसी, इंश्योरेंस और बेवरेजेज कंपनियों के शेयरों में पैसे लगाकर अच्छी कमाई की जा सकती है।