इस साल कमजोर रह सकता है मानसून, अल नीनो के 60 फीसदी चांस- अमेरिका

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (25 मार्च): देश भर में जहां गर्मी का धीरे-धीरे बढ़ने लगा है। वहीं बारिश को लेकर निराशाजनक खबरें सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि इस साल अलनीनो का असर होगा और देश में इस बार मानसून कमजोर हो सकता है। अमेरिकी मौसम विभाग की माने तो इस साल अलनीनो की वजह से भारत में मानसून कमजोर रहेगा और औसत से 40 फीसदी तक कम बारिश हो सकती है। अमेरिकी मौसम विभाग के मुताबिक भारत में इस साल मानसूनी बारिश औसत के 60 फीसदी के करीब होगी। अमेरिकी मौसम विभाग की ये आशंका भारत के लिए चिंता का सबब बन सकता है। देश में खरीफ की फसल की बुआई बारिश के भरोसे होती है। ऐसे में कृषि आधारित अर्थव्यवस्था लिए यह संकेत अच्छे नहीं है।

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वहीं ऑस्ट्रेलिया की सरकारी एजेंसी ब्यूरो ऑफ मेट्रोलॉजी ने चेतावनी दी है कि इस साल अल नीनो होने की 70 फीसदी उम्मीद है। ऑस्ट्रेलिया के मौसम विभाग ने कहा है कि इस साल की दूसरी छमाही के आसपास अल नीनो का अनुमान है। आस्ट्रेलियाई एजेंसी का यह अनुमान भारत के लिए शुभ संकेत नहीं हैं क्योंकि 1 जून के आसपास देश में मानसूनी सीजन का आगाज होता है। भारत में मानसून सीजन जून से लेकर सितंबर तक चलता है यानी अगर मौसम सामान्य रहता है तो 4 महीने जमकर बारिश होती है। देश में आमतौर पर अगस्त से लेकर सितंबर तक सबसे ज्यादा (करीब 70 फीसदी) बारिश होती है।

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अलनीनो की स्थिति को देखे तो इससे विश्व में बाढ़ और सूखे सरीखे मौसमी बदलाव सामने आते हैं। हवाओं की दिशा बदलने, कमजोर पडने और समुद्र के सतही पानी का तापमान बढने से अलनीनो सक्रिय होता है। जिससे बारिश के प्रमुख क्षेत्र बदल जाते हैं। जिन इलाकों में कम बारिश तो वहां ज्यादा और जहां ज्यादा तो वहां कम बारिश होती है। ऐसी स्थिति प्रत्येक 10 साल में 2 से 3 बार सामने आती है। जब अलनीनो के कारण प्रशांत महासागर के पानी का तापमान कहीं-कहीं 10 सेटीग्रेट तक बढ़ जाता है। पेरू के तट पर सबसे अधिक तापमान बढ़ता है, लेकिन इसक प्रभाव दूर-दूर तक देखने को मिलता है। इसके कारण दक्षिणी अमेरिका, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया से लेकर दक्षिण-पूर्वी एशिया की ओर बहने वाली हवाओं की गति बेहद सुस्त पड़ जाती है। जिसके कारण इन इलाकों में सूखे के हालात बनते हैं।