अगर नहीं होती यह 6 चूक तो बच जाती जवानों की जान...

नई दिल्ली (21 सितंबर): ऊरी में नियंत्रण रेखा से लेकर सेना के 10 डोगरा केम्प तक अगर नहीं होती 6 बड़ी चूक तो जैश के फिदायीन आतंकी हमले 18 सैनिकों की जान नहीं जाती। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 6 बार सेना जैश के इन आतंकियों को पकड़ने या मार गिराने से चूकी।

चूक 1: सबसे पहली चूक LOC नियंत्रण रेखा पर हुई। न्यूज़ 24 को सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जैश के इन आतंकियों ने सुखदार LOC से घुसपैठ की जो उरी टॉउन में ब्रिगेड हेडक्वाटर से महज़ चार किलोमीटर की दूरी पर है। यानी यह बेहद ही संवेदनशीन नियंत्रण रेखा है और यहां सुरक्षा कड़ी से कड़ी होनी चाहिए। अगर सेना ने इन चार आतंकियों को यही घुसपैठ के समय रोका या मारा होता तो उरी हमला नहीं होता।

चूक 2: घुसपैठ करने के बाद इन आतंकियों ने सेना द्वारा LOC पर लगाई चार लेयर फेंसिंग काटी। अगर सेना फेंसिंग की हर रोज़ जांच करती तो कटी फेंसिंग को देखकर घुसपैठ का पता लगाया जा सकता था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

चूक 3: फेंसिंग काटने के बाद रिहायशी इलाके तक पहुंचते आतंकियों ने कई सेना व BSF के चेक पोस्ट पार किए। अगर यहां पर चेकिंग व फ्रिस्किंग होती तो इन जैश के फिदायीन आतंकियों को वही दबोचा जा सकता था।

चूक 4: न्यूज़ 24 को सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रिहायशी इलाके में पहुंचने के बाद यह आतंकी कई दिनों तक उरी में मौजूद रहे। सूत्रों की माने तो यह आतंकी सुखदार गांव में दुबारा देखे गए और महिला ने जानकारी सेना को दी, लेकिन सेना ने तलाशी अभियान तो चलाया पर इनके ना मिलने पर इस खबर को हल्के में ले लिया। सेना ने ना केवल आतंकियों की तलाश छोड़ दी बल्कि कैंप को सुरक्षित करने के लिए इंतजामों की जांच भी नहीं की।

चूक 5: उरी की महिला के इलावा पुलिस और खुफिया एजेंसी ने भी सेना को आतंकियों की मौजूदगी की खबर दी , लेकिन सेना के अधिकारी तब भी नहीं जागे। आतंकी कैंप की कई बार रैकी करते और अंदर के किसी व्यक्ति से संपर्क साधकर सारी जानकारियां भी जुटाते रहे, लेकिन सेना गफलत में रही।

चूक 6: सेना के इन्फेंट्री ब्रिगेड से स्टे 10 डोगरा के कैंप तक पहुंचने के लिए आतंकियों ने एक बार फिर कई चेक पोस्ट पार किए, लेकिन आतंकी किसी चेक पोस्ट पर नहीं रोके गए। आतंकियों को पता था कि सेना के जवान केम्पस मे सोए है और उन्होंने रणनीति के तहत टेंट्स में आग लगा दी।

10 डोगरा मे बड़ी बिल्डिंग खाली होने के बावजूद सेना के जवान टेंट्स में क्यों सोए हुए थे। अगर सेना के जवान केम्पस के बजाय बिल्डिंग में होते तो इतने सैनिकों की जान नहीं जाती। इन्ही सभी चूक की छानबीन NIA और सेना की जांच कमेटी कर रही है और हर सवाल का जवाब हमले पर पडे़ एक-एक परदे को उठा रहा है। यह बात तय है कि हमले से संबंधित रिपोर्ट आने के बाद सेना के कई आला अधिकारियों पर गाज गिर सकती है।