बिना इजाजत खादी कैलेंडर पर लगाई फोटो, नाराज हैं पीएम मोदी

नई दिल्ली ( 16 जनवरी ): खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के कैलेंडर और डायरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फोटो प्रकाशित की गई है जिसे लेकर काफी विवाद हो रहा है। इस मुद्दे को लेकर राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल जैसे विपक्षी दलों के नेताओं ने सरकार की आलोचना की है।  खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के कैलेंडर और डायरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फोटो का इस्तेमाल बिना इजाजत के करने से प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) नाराज है और इसने इस मामले में माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (एमएसएमई) से जवाब मांगा है।


इस मामले से वाकिफ बड़े सरकारी अधिकारियों ने बताया कि पीएम इससे नाराज हैं। नाम नहीं छापने की शर्त पर अधिकारियों ने बताया कि बिना इजाजत सरकारी या प्राइवेट एंटिटी की तरफ से प्रधानमंत्री के फोटो के इस्तेमाल का यह पहला मामला नहीं है। एक बड़े अधिकारी ने बताया, ‘प्रधानमंत्री को खुश करने या उनके करीब दिखने के लिए ऐसा पहली बार नहीं हुआ है।’


उन्होंने कहा कि रिलायंस इंडस्ट्रीज की टेलीकॉम कंपनी जियो और मोबाइल वॉलेट सर्विस फर्म पेटीएम के ऐड में भी प्रधानमंत्री की फोटो का बिना इजाजत इस्तेमाल हुआ था। केवीआईसी के कैलेंडर और डायरी में आमतौर पर महात्मा गांधी के चरखा कातने वाले ऐतिहासिक फोटोग्राफ का इस्तेमाल होता आया है। हालांकि, केवीआईसी के अधिकारियों ने बताया कि कैलेंडर और डायरी में महात्मा गांधी के फोटोग्राफ का इस्तेमाल नहीं करने का यह पहला मामला नहीं है। उन्होंने बताया कि पहले कम से कम पांच बार आम नागरिकों के फोटोग्राफ का इस्तेमाल इनमें हो चुका है। केवीआईसी के एक टॉप अधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री का फोटोग्राफ इसलिए यूज किया गया क्योंकि वह लोकप्रिय और खादी के भारी समर्थक हैं।


अधिकारी ने बताया, ‘पिछले साल अक्टूबर में मोदीजी ने लुधियाना में महिला बुनकरों के बीच 500 चरखे वितरित किए थे। इस घटना की वजह से कैलेंडर पर उनका फोटो छापने का फैसला हुआ।’ केवीआईसी के चीफ वी के सक्सेना हैं, जिन्हें 2015 में एनडीए सरकार ने नियुक्त किया था। उन्होंने हाल ही में कहा था कि प्रधानमंत्री की तस्वीरों का इस्तेमाल संस्थान के मूल आदर्शों से मेल खाता है। उन्होंने कहा था कि मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से खादी को बढ़ावा मिला है। इसलिए उनके फोटो का इस्तेमाल हुआ। सक्सेना ने बताया कि 2015-16 में खादी की बिक्री 34 पर्सेंट बढ़ी, जबकि उससे पहले के दशक में इसमें 2-7 पर्सेंट का इजाफा हुआ था।