UPSC परीक्षा में सफल अंसार को इसलिए रखना पड़ा था हिंदू नाम 'शुभम'...

पुणे (11 मई) :  यूपीएससी की परीक्षा को सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है। हर साल परीक्षा के नतीजे आने के बाद सफल अभ्यर्थियों की ऐसी कई कहानियां सामने आ रही हैं कि कितनी मुश्किलें सहने के बाद उन्होंने परीक्षा को पास किया। इस साल महाराष्ट्र के एक ऑटोचालक के बेटे ने सभी बाधाओं को पार करते हुए संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में सफलता प्राप्त की है। 21 साल के अंसार अहमद शेख को परीक्षा की तैयारी के दौरान धार्मिक भेदभाव से बचने के लिए हिंदू के रूप में पहचान तक बदलनी पड़ी थी। आखिरकार फ्लैट हासिल करने के लिए अंसार को 'शुभम' बनना पड़ा था।

परीक्षा परिणाम की घोषणा के बाद से ही अंसार और उसके घरवालों के पास बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। सूखा प्रभावित मराठवाड़ा क्षेत्र के जालना जिले के शेलगांव गांव के रहने वाले अंसार ने पहली ही कोशिश में परीक्षा को पास किया और राष्ट्रीय सूची में 361वां रैंक प्राप्त किया। अंसार ने जालना जिला स्कूल से अपनी शुरुआती शिक्षा हासिल की। उसके बाद उन्होंने पुणे के फर्ग्‍युसन कॉलेज से 2015 में 73 फीसदी नंबरों के साथ राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की। उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा में भी इसी विषय को मुख्य विषय बनाया।

अंसार जब तीन साल पहले पुणे के फर्ग्‍युसन कॉलेज में दाखिला लेने आए थे तो उन्हें अपना सरनेम बदल कर 'शुभम' रखना पड़ा था। ऐसा उन्होंने इसलिए किया कि आसानी से रहने की जगह मिल जाए और बिना कठिनाई खाने का इंतजाम हो जाए। लेकिन अब अंसार गर्व से अपने मुस्लिम नाम और अल्पसंख्यक पहचान के साथ सांप्रदायिक सद्भाव के लिए काम करना चाहते हैं। शेख कहते हैं, "मैं तीन अलग-अलग श्रेणियों में हाशिये पर था। मैं एक पिछड़े अविकसित क्षेत्र से हूं। मैं एक गरीब घर से हूं और एक अल्पसंख्यक समुदाय से हूं। मैं एक प्रशासक के रूप में इन सभी मुद्दों से निपट सकता हूं, क्योंकि मैंने इसे करीब से देखा है।"

अंसार अन्य पिछड़ा वर्ग श्रेणी से आने के कारण भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में जाने के हकदार हैं। अंसार की इस कामयाबी में गैरेज में काम करने वाले उनके भाई का भी बड़ा हाथ है। अपनी मां और अन्य रिश्तेदारों से गले लगे भावुक शेख ने कहा, "मेरा भाई एक गैराज में काम करता है। उसने मुझे हमेशा सहारा दिया। आज जो कुछ मैंने प्राप्त किया है, उसके सहारे के बिना असंभव था।"