कौडियों के दाम में बची गई यूपी वक्फ बोर्ड की जमीन

अशोक तिवारी, लखनऊ (22 अप्रैल): उत्तर प्रदेश में वक्फ बोर्ड के भीतर बड़े घोटाले की खबर आई है। राज्य के वक्फ मामलों के मंत्री मोहसिन रज़ा का आरोप है कि यूपी के शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड में करोड़ों की गड़बड़ी हुई है। सबसे बड़ा घपला वक्फ की संपत्ति पर कब्जे को लेकर हुआ है। योगी के मंत्री इसके लिए अखिलेश सरकार की तरफ इशारा कर रहे हैं। न्यूज़ 24 ने इस दावे की बड़ी पड़ताल की।


सुन्नी वक्फ बोर्ड के दफ्तर के कैंपस में खड़ी एक पुरानी कार के भीतर फाइलों का अंबार और इसके भीतर मिली कई अधजली फाइलें। यहां योगी सरकार के मंत्री अचानक आ धमके थे। सुन्नी वक्फ बोर्ड का जायजा लेना शुरू ही किया था कि इस पुरानी कार को देखकर चौंक गए। योगी के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री को शक है कि वक्फ बोर्ड में घोटाले की फाइलों को ठिकाने लगाने की साजिश रची गई थी।


अब ये समझिए कि यूपी वक्फ बोर्ड की आर्थिक हैसियत क्या है।

- यूपी के सुन्नी वक्फ बोर्ड के पास 1 लाख 24 हजार से ज्यादा वक्फ प्रॉपर्टी है

- बड़े-बड़े शहरों में वक्फ बोर्ड के पास सैकड़ों एकड़ जमीन है।

- इसकी कीमत करोड़ों में है। लेकिन इससे होनेवाली आमदनी का हिसाब-किताब दुरुस्त नहीं है।

- यूपी में सुन्नी के साथ ही शिया वक्फ बोर्ड भी है।

- शिया वक्फ बोर्ड में साढ़े सात हजार रजिस्टर्ड वक्फ हैं। जिसके तहत 50 हजार वक्फ प्रॉपर्टी है। इनकी कीमत

भी सैकड़ों करोड़ में है।

- लेकिन इससे होने वाली सालाना कमाई का भी पुख्ता हिसाब किताब नहीं।


सत्ता में आते ही योगी सरकार ने साफ कर दिया था कि वक्फ बोर्ड के नाम पर जारी भ्रष्टाचार अब खत्म होगा। बीजेपी ने इसके लिए पूर्व वक्फ मंत्री आजम खान को जिम्मेदार ठहराया था। और उन पर बड़ी गड़बड़ी का आरोप लगाया। शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद ने आजम खान के वक्फ मंत्री रहते हुए वक्फ बोर्ड में 400 करोड़ की गड़बड़ी का आरोप लगाया है।


आज़म के समय में बनाए गए शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी भी जव्वाद के निशाने पर हैं, लेकिन वसीम इन आरोपों को खारिज करते हैं। हालांकि गड़बड़ी के आरोपों को हल्के में खारिज नहीं किया जा सकता। ये सच है कि वक्फ बोर्ड की अरबों की संपत्ति पर अवैध कब्जे होते रहे, लेकिन दोषियों पर नकेल नहीं कसी गई।


ये सिर्फ लखनऊ की तस्वीर है, पूरे उत्तर प्रदेश के अलग-अलग शहरों में वक्फ की करोड़ की प्रॉपर्टी को कौड़ी के भाव बेचा जाता रहा। लेकिन ना तो वक्फ बोर्ड ने इसे रोका और ना ही सरकार ने। इसी वजह से शक गहरा रहा है।