योगी के आते ही अवैध बूचड़खानों पर लगने लगे ताले

नई दिल्ली (22 मार्च): यूपी में योगी राज का सबसे पहला असर बूचड़खानों पर पड़ा है। प्रदेश में चल रहे बूचड़खानों के खिलाफ प्रशासन ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। इलाहाबाद से शुरू हुआ कार्रवाई का सिलसिला अब पूरे प्रदेश में फैल चुका है। बिजनौर और बस्ती से लेकर आगरा तक में अवैध तरीके से चल रहे बूचड़खानों पर शिकंजा कस दिया गया है।


यूपी के बूचड़खानों के खिलाफ कार्रवाई तेज हो गई है। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में प्रशासन अचानक से एक्शन में आ गया है। बूचड़खानों पर ताले लगाए जा रहे हैं। बिजनौर में काफी वक्त से चल रहे एक बूचड़खाने पर अचानक हुई कार्रवाई से हड़कंप मच गया। अल-उमर इंटरनेशनल नाम से चल रहे इस बूचड़खाने का लाइसेंस पिछले साल दिसंबर तक का था। हालांकि इसके मालिक ने रिनुअल के लिए अक्टूबर में ही अप्लाई कर दिया था। लेकिन रिनुअल नहीं हो पाया था। अब पुलिस के साथ पहुंचकर जिला प्रशासन के अमले ने बूचड़खाने को सील कर दिया। बूचड़खाने के मालिक का आरोप है कि उनके पास सभी तरह की इजाजत होने के बावजूद ये कार्रवाई की गई है जो कि पूरी तरह नाजायज है।


प्रदेश में बूचड़खानों के खिलाफ चल रही कार्रवाई से बूचड़खाना मालिक और वहां काम करनेवालों में खलबली मची हुई है। बस्ती जिले में हालांकि पहले से ही बूचड़खाने बंद हैं। लेकिन गोडिया गांव में एक बूचड़खाना अवैध रूप से चल रहा था। जबकि इसे 2013 तक चलाने की ही इजाजत मिली हुई थी। लिहाजा प्रशासन ने उसे बंद करवा दिया। अब बूचड़खाने के मालिक खुद के साथ-साथ यहां काम करनेवालों के रोजगार की दुहाई देते हुए इसे फिर से चलाने देने की मांग कर रहे हैं।


बूचड़खानों पर हो रही कार्रवाई का असर आगरा में भी पड़ा है। यहां दो बूचड़खाने हैं, जिनमें से एक नगर निगम का जबकि दूसरा बीएसपी के एक पूर्व विधायक का है। फिलहाल इन्हें दो दिनों के लिए बंद रखा गया है। हालांकि नगर निगम अधिकारी की मानें तो एनजीटी के निर्देश पर 6 महीने पहले ही तीन अवैध बूचड़खानों को बंद करा दिया गया था। अब यहां कोई अवैध बूचड़खाना नहीं पाया गया है।


कार्रवाई की आशंका को लेकर पूरे प्रदेश के बूचड़खानों में हड़कंप मचा है। और इसके पीछे जो अहम वजह मानी जा रही है वो है प्रदेश में नई सरकार का आना।