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प्रयागराज में बनेगी निषादराज को गले लगाते हुए भगवान राम की मूर्ति, केशव प्रसाद मोर्य ने की घोषणा

2019 के लोकसभा चुनाव के लिए राजनैतिक दलों ने सियासी पारियां खेली शुरू कर दी हैं। बीजेपी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर भगवान राम को भुनाने में कोई भी कसर नहीं छोड़ रही है। जिसके लिए हिंदुत्व की पर्याय कही जाने वाली भारतीय जनता पार्टी की ओर से तमाम एक के बाद एक कदम उठाए जा रहे हैं। यूपी में सत्ताधारी पार्टी बीजेपी ने मंगलवार को घोषणा करते हुए कहा कि प्रयागराज (इलाहाबाद) में भगवान राम की मूर्ति के साथ निषाद राज की मूर्ति की स्थापना की जाएगी।

                                                                                                       Image Source: Google

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (21 नवंबर): 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए राजनैतिक दलों ने सियासी पारियां खेली शुरू कर दी हैं। बीजेपी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर भगवान राम को भुनाने में कोई भी कसर नहीं छोड़ रही है। जिसके लिए हिंदुत्व की पर्याय कही जाने वाली भारतीय जनता पार्टी की ओर से तमाम एक के बाद एक कदम उठाए जा रहे हैं। यूपी में सत्ताधारी पार्टी बीजेपी ने मंगलवार को घोषणा करते हुए कहा कि प्रयागराज (इलाहाबाद) में भगवान राम की मूर्ति के साथ निषाद राज की मूर्ति की स्थापना की जाएगी।आपको बता दें कि घोषणा में कहा गया कि अगले साल होने वाले कुंभ के दौरान इसकी स्थापना की जाएगी। आपको बता दें कि बीजेपी के द्वारा कुछ समय पहले अयोध्या में भगवान राम की स्टैच्यू की स्थापना की घोषणा भी की गई थी।भगवान राम की नई मूर्ति की स्थापना की घोषणा करते हुए उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि रामायण में भगवान राम मछुआरों के राजा निषाद राज को गले लगाया था, इसी की प्रतिमा इलाहाबाद में गंगा किनारे श्रींगवरपुर में स्थापित की जाएगी।  ऐसा माना जाता है कि श्रींगवरपुर ही वह स्थान है जहां वनवास के दौरान भगवान श्रीराम निषादराज से मिले थे, जहां उन्होंने भगवान राम को गंगा पार करवाने में मदद की थी। मौर्या ने कहा कि श्रींगवरपुर समरसता (सामाजिक सौहार्द) के नाम से जाना जाता है, यही कारण है कि इस स्थान पर भगवान राम और निषादराज की मूर्ति की स्थापना पर विचार किया गया।उन्होंने यह भी कहा कि इस पर अभी भी विचार किया जा रहा है और जल्द ही इसे अंतिम रुप दिया जाएगा। गौरतलब है कि बीजेपी के इस कदम को पिछड़े वर्गों को लुभाने के लिए एक नए प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि रामायण युग में निषादराज एक पिछड़ी जाति के राजा थे।

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