मोदी सुनामी में बच गए बाहुबली

नई दिल्ली(12 मार्च): उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में मोदी की आंधी में बीजेपी को भारी बहुमत मिला। विरोधी पार्टियों के कई बड़े दिग्गज नेताओं को इस लहर में मुंह की खानी पड़ी। लेकिन इस दौर में कई ऐसे नेता भी हैं जिनकी छवि एक बाहुबली नेता की है और वे चुनाव जीतने में सफल रहे हैं।

- एक नजर उन बाहुबली नेताओं पर जिन्होंने इस लहर में भी अपनी सीट बचा ली..

राजा भैया

- उत्तरप्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के कुंडा विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया का जलवा कायम है। राजा भइया ने इस विधानसभा सीट से रिकॉर्ड सातवीं जीत दर्ज की है। राजा भैया ने इस सीट पर बीजेपी नेता जानकी शरण पाण्डेय को 1 लाख 3 हजार से अधिक वोटों से हराया। यूपी की राजनीति में राजा भैया के दबदबे और कद का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 1996 के बाद वह हर सरकार में मंत्री बने।

मुख्तार अंसारी

- दूसरे नंबर पर आते हैं बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी। प्रदेश की सबसे हॉट सीटों में शुमार मऊ सदर विधानसभा सीट बाहुबली मुख्तार अंसारी के चलते चर्चा में रहती है। इस बार की लड़ाई 'बाहुबली' के लिए आसान नहीं रही। 27 फरवरी को मऊ की चुनावी रैली में पीएम ने बाहुबली और कटप्पा का जिक्र किया था जिसके बाद यहां की लड़ाई दिलचस्प हो गई थी। लेकिन बीएसपी के टिकट पर मुख्तार अंसारी ने लगातार चौथी बार चुनाव जीत लिया। मुख्तार ने बीजेपी के सहयोगी पार्टी के उम्मीदवार महेंद्र राजभर को हराते हुए इस सीट पर अपना कब्जा जमाया।

सुशील सिंह

चंदौली जिले की सैयदराजा सीट पर तीन बाहुबली मैदान में थे। समाजवादी पार्टी से मनोज सिंह डब्लू, बीजेपी से सुशील सिंह और बीएसपी से विनीत सिंह के बीच त्रिकोणीय मुकाबला हुआ और इसमें सुशील सिंह जीत हासिल की। सुशील सिंह एक बाहुबली नेता है और उनके चाचा माफिया डॉन बृजेश सिंह खुद भी वाराणसी से एमएलसी हैं।

विनय शंकर तिवारी

बहुजन समाजवादी पार्टी के बाहुवली नेता और पूर्वांचल के बाहुबली नेताओं में शुमार हरिशंकर तिवारी के बड़े बेटे विनय शंकर तिवारी ने जीत दर्ज की है। गोरखपुर की चिल्लूपार विधानसभा सीट से विनय शंकर ने बीजेपी उम्मीदवार राजेश त्रिपाठी को चार हजार वोटों हराया। हरिशंकर तिवारी ने अपने बेटे विनय शंकर को अपनी हार का बदला लेने के लिए उतारा था।

अमनमणि त्रिपाठी

- इसी तरह पूर्व मंत्री और बाहुबली नेता अमरमणि त्रिपाठी का बेटा अमनमणि विधानसभा में पहुंचाने में कामयाब रहा। अमनमणि की जीत में उसकी दोनों बहनों का बड़ा हाथ रहा, जो भाई के जेल में होने के बावजूद बाहर उसका जमकर प्रचार करती रहीं। महाराजगंज के नौतनवां सीट से अमनमणि ने बीजेपी के समीर त्रिपाठी को बड़े अंतर से हराया।