सबसे ज़्यादा गरीब आदमी हुआ नोटबंदी का शिकार: अखिलेश यादव

नई दिल्ली ( 7 नवंबर ): समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि बीते वर्ष 08 नवंबर को केंद्र की बीजेपी सरकार ने नोटबंदी के जरिए पांच सौ और हजार रुपये के नोटों को बंद करने की अचानक घोषणा की थी। अखिलेश ने कहा कि नोटबंदी के पीछे के जो उद्देश्य बताए गए थे वे सब खोखले थे। 

सरकार के इस अदूरदर्शिता पूर्ण निर्णय से आर्थिक जगत में अराजकता का माहौल पैदा हुआ है। बेरोजगारी के साथ निर्माण कार्य बंद होने का दंश जनता को झेलना पड़ा। उन्होंने कहा कि नोटबंदी का शिकार सबसे ज्यादा गरीब आदमी हुआ। 

अखिलेश यादव ने अपने बयान में कहा कि पूरा देश आर्थिक अराजकता के दौर में है। पांच सौ और हजार रुपये के नोटों को चलन से बाहर करने की अचानक घोषणा के साथ उसके पीछे जो उद्देश्य बताए गए थे, वे सब खोखले थे। अपनी छवि चमकाने के लिए प्रधानमंत्री ने रिजर्व बैंक या मंत्रिमंडलीय सहयोगियों को विश्वास में लिये बिना यह राजनीतिक फैसला लिया था जिससे 64 बार उन्हें नियम बदलने पड़े। कृषि इस देश की अर्थ व्यवस्था की रीढ़ है, लेकिन इस क्षेत्र को सर्वाधिक नुकसान उठाना पड़ा। 

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं शुरू से ही कहता आ रहा हूं कि रुपया काला सफेद नहीं होता, लेन-देन काला सफेद होता है। परंतु कालेधन का हौवा खड़ा किया गया। स्वयं रिजर्व बैंक की रिपोर्ट कहती है कि जो नोट उसने जारी किए थे, उसमें से 99 प्रतिशत वापस आ गए हैं। आतंकी गतिविधियां रोकने के दावों की हकीकत यह है कि कश्मीर घाटी में पहले से ज्यादा आतंकी घटनाएं घटी है। नक्सली गतिविधियां भी थमी नहीं है। पृथकतावादी जगह-जगह सिर उठा रहे हैं। सरकारों का काम जनता को धोखा देना नहीं हो सकता।