अनिल दवे ने पहले ही वसीयत में लिख दी थीं अपनी ये इच्छाएं, पढ़कर भावुक हो जाएंगे आप

नई दिल्ली ( 18 मई ): केंद्रीय मंत्री अनिल माधव दवे का गुरुवार को दिल्ली मे निधन हो गया। आपको जानकर हैरानी होगी कि केंद्रीय मंत्री दवे ने पांच साल पहले ही अपनी वसीयत लिख दी थी। अपने लेटर पैड पर लिखी इस वसीयत में उन्होंने अंतिम संस्कार को लेकर चार बातें लिखी थीं, जिसमें उन्होंने अंतिम संस्कार की जगह बता दी थी।


अनिल माधव दवे ने 23 जुलाई 2012 को सांसद के अपने लेटर पैड पर अपनी वसीयत लिखी थी। यह वसीयत इंदौर में रहने वाले उनके छोटे भाई अभय दवे के घर पर रखी थी। वसीयत में उन्होंने मुख्य रूप से अंतिम संस्कार को लेकर चार बिंदु लिखे थे। सबसे पहले उन्होंने लिखा था कि संभव हो तो मेरा दाह संस्कार बाद्राभान में नदी महोत्सव वाले स्थान पर किया जाए। उत्तर क्रिया के रूप में केवल वैदिक कर्म ही हों। किसी भी प्रकार का दिखावा, आडंबर ना हो। मेरी स्मृति में कोई भी स्मारक, प्रतियोगिता, पुरुस्कार, प्रतिमा इत्यादि विषय कोई भी न चलाएं।


उन्होंने वसीयत में लिखा कि जो मेरी स्मृति मे कुछ करना चाहते हैं। वे कृपया वृक्षों को लगाने अथवा संरक्षित कर बड़ा करने का कार्य करेंगे तो मुझे आनंद होगा। वैसे ही नदी, जलाशयों के संरक्षण में अपनी सामर्थ्य अनुसार अधिकतम प्रयत्न भी किए जा सकते हैं। ऐसा करते हुए भी मेरे नाम के प्रयोग से बचेंगे। इसके नीचे तारीख लिखकर उन्होंने अपने साइन कर तारीख लिखी थी। इसके नीचे उन्होंने भाषा दोष के लिए क्षमा भी मांगी थी।